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जालौन के उरई स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हुए विवाद ने अब प्रशासनिक और कानूनी रूप ले लिया है। मरीज के परिजनों की तहरीर पर डॉक्टर आराध्य नगाइच सहित करीब 40 जूनियर और सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया। FIR दर्ज होने के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में धरना शुरू कर दिया, जिससे ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित हो गईं और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद जूनियर डॉक्टरों ने समाप्त किया, वहीं डीएम ने तीन सदस्य मजिस्ट्रियल जांच समिति गठित की है जो जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। बता दे कि घटना 18 मई 2026 की मध्यरात्रि करीब 12 बजे की है, जब मेडिकल कॉलेज में स्मृति गुप्ता पुत्री बृज किशोर गुप्ता के इलाज को।लेकर स्मृति के परिजनों और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया था। मामला बढ़ने के बाद दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बन गई थी, जिसमें डॉक्टर आराध्य नगाइच की शिकायत के बाद ब्रजकिशोर गुप्ता और उनके बेटे के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली थी, जिसके बाद व्यापारियों ने बाजार बंद कर डाक्टरों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों द्वारा मारपीट की गई, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई, जिसके बाद एसपी विनय कुमार ने धरना समाप्त कराया और पुलिस ने मामले में डॉक्टर आराध्य नगाइच सहित 40 डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। FIR दर्ज होने के बाद गुरुवार को जूनियर डॉक्टर आक्रोशित हो गए और कार्रवाई को गलत बताते हुए मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों की मांग थी कि निष्पक्ष जांच किए बिना उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा निरस्त किया जाए। धरने के कारण मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को घंटों परेशान होना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज के वापस लौटते भी दिखाई दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी जूनियर डॉक्टरों के बीच पहुंचे और उनसे वार्ता की। प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने अपना धरना समाप्त कर दिया, जिसके बाद ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो सकीं। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय मजिस्ट्रियल जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में अपर जिलाधिकारी प्रेमचन्द्र मौर्य को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राजकीय मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत अवस्थी तथा अपर पुलिस अधीक्षक IPS डॉ. ईशान सोनी को सदस्य नामित किया गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि गठित समिति पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करेगी। समिति विवाद के कारणों, संबंधित पक्षों की भूमिका, मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर भी अपनी रिपोर्ट देगी। प्रशासन ने समिति को शीघ्र जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि जूनियर डॉक्टरों का धरना समाप्त हो चुका है और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की बाधा नहीं है और मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से जारी हैं। फिलहाल प्रशासन, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और संबंधित पक्षों के बीच आपसी समन्वय बनाकर पूरे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
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डॉक्टरों पर FIR के बाद जूनियर डॉक्टर धरने पर:जालौन में DM ने तीन सदस्यीय मजिस्ट्रियल जांच समिति गठित की