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जौनपुर में शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री का व्रत रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना की। सुबह से ही महिलाएं टोलियों में वट वृक्ष के पास पहुंचने लगी थीं। व्रत के लिए महिलाओं ने सत्यवान और सावित्री की मूर्ति या तस्वीर, जल से भरा कलश, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, कच्चा सूत, धूप, अगरबत्ती, कपूर, मिट्टी का दीपक, नई लाल या पीली चुनरी और पंचामृत जैसी पूजन सामग्री जुटाई। इस मौके पर पहली बार व्रत रख रहीं विवाहित महिलाएं विशेष रूप से उत्साहित दिखीं। सोलह श्रृंगार कर पहुंची महिलाओं ने वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा की और उस पर रक्षा सूत्र बांधा। उन्होंने अपने पति की लंबी उम्र और सात जन्मों तक साथ रहने की कामना की। पंडित अभिषेक पांडेय ने वट सावित्री व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसे अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली और पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। शास्त्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। शनिवार को व्रत का मुहूर्त सुबह लगभग 5 बजे शुरू हुआ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत का संबंध सावित्री और सत्यवान की कथा से है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता सावित्री के दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण वापस कर दिए थे। इसी कारण यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पंडित लाल साहब पाठक ने बताया कि वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास स्थान माना जाता है, इसलिए इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा, परिक्रमा और उस पर धागा बांधने से अखंड सौभाग्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विवाहित महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। इस अवसर पर माता सावित्री और सत्यवान की कथा सुनना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत:जौनपुर में पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना की