Dhar Bhojshala Case Verdict | Muslim Side Free to Approach SC

सभी पदाधिकारियों ने यज्ञ कुंड के समीप पहुंचकर भी श्रद्धापूर्वक दर्शन किए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस परिसर को राजा भोज के समय का वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा करने का अधिकार दे दिया है।

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शुक्रवार को आए इस फैसले के बाद शनिवार सुबह श्रद्धालुओं और अलग-अलग समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 को जारी किए गए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को एक निश्चित अवधि के लिए नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

ASI के वकील अविरल विकास खरे ने कानूनी पहलू स्पष्ट किए…

  • भोजशाला स्थल को वर्ष 1904 से ‘संरक्षित स्मारक’ का दर्जा प्राप्त है।
  • इस स्मारक का पूरा प्रशासन, नियमन और निगरानी केवल ASI के पास ही रहेगी।
  • कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर माना है कि इसका निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था।

देखिए फैसले के बाद शनिवार की तस्वीरें…

सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर मुस्लिम पक्ष द्वारा इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की संभावना को देखते हुए, हिंदू पक्ष की ओर से शीर्ष अदालत में 2 कैविएट याचिकाएं दायर कर दी गई हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति को वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना शनिवार सुबह परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी पहुंचे। इनमें भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे और भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा सहित श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के समीप पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

‘भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी’ दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना किसी रोक-टोक और बाधा के पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने अपना बयान दिया। उन्होंने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।”

मुस्लिम पक्ष के आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर थी, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगी। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है।

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पढ़ें पूरी खबर…

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