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सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग ने इलाज के क्षेत्र में एक नई सफलता हासिल की है। कॉलेज में पहली बार नई आधुनिक तकनीक एंटीरियर हिप एप्रोच से कूल्हे का सफल ऑपरेशन किया गया। इस तकनीक से 65 और 70 साल के दो बुजुर्ग मरीजों का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गोयल और उनकी टीम ने किया। डॉ. अमित गोयल ने बताया कि एंटीरियर हिप एप्रोच एक नई और आसान सर्जरी तकनीक है। इसमें छोटा चीरा लगाकर कूल्हे का ऑपरेशन किया जाता है, जिससे शरीर की मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचता है। इसी वजह से मरीज को ऑपरेशन के बाद दर्द भी कम होता है और ज्यादातर मरीज लगभग 24 घंटे में चलने-फिरने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से मरीज की रिकवरी तेजी से होती है और उसे ज्यादा दिन तक बिस्तर पर नहीं रहना पड़ता। साथ ही ऑपरेशन के बाद कूल्हा अपनी जगह से खिसकने का खतरा भी कम रहता है। यह तकनीक खासतौर पर बुजुर्ग मरीजों के लिए काफी फायदेमंद मानी जा रही है। डॉ. गोयल ने कहा कि उम्र ज्यादा होने पर कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद मरीज को जल्दी खड़ा करना और चलाना बहुत जरूरी होता है। अगर मरीज जल्दी सामान्य जिंदगी में लौट आए तो दूसरी बीमारियों और कमजोरी का खतरा भी कम हो जाता है। नई तकनीक इसमें काफी मददगार साबित हो रही है। क्या है एंटीरियर हिप एप्रोच तकनीक इस प्रक्रिया में सर्जन सामने से हिप जॉइंट तक पहुंचते हैं, जिससे मांसपेशियों को काटने की आवश्यकता नहीं होती। इसके कारण रोगी को कम दर्द, तेजी से चलना शुरू करने की सुविधा और कम हॉस्पिटल स्टे मिलता है। इसमें फेमर (Femur) और एसिटाबुलम (Acetabulum) के डैमेज हिस्सों को कृत्रिम जोड़ (Prosthetic Implant) से बदल दिया जाता है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज लगातार नई चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास कर रहा है। आने वाले समय में इससे आगरा और आसपास के मरीजों को भी बड़े शहरों जैसी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।
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SN में नई तकनीक से हुआ बुजुर्गाें का हिप ऑपरेशन:छोटा चीरा लगाकर कम होता दर्द, लगभग 24 घंटे में हो जाती मरीज की रिकवरी