क्या बिहार में तेजस्वी की छाया से बाहर निकलेगी कांग्रेस:तमिलनाडु में राहुल ने DMK को छोड़ा, प्रशांत किशोर के साथ जाने की कितनी संभावना


तमिलनाडु में राहुल गांधी के DMK का साथ छोड़कर फिल्मी सितारे विजय से गठजोड़ करने की घटना ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। RJD-कांग्रेस के गठबंधन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इस बीच 8 मई को तेजस्वी यादव ने साफ शब्दों में कहा- भाजपा को क्षेत्रीय दल ही टक्कर दे सकते हैं। अब सवाल है- क्या कांग्रेस तमिलनाडु वाला साहस बिहार में भी दिखाएगी। थालापति विजय के फ्रेंड प्रशांत किशोर से हाथ तो नहीं मिला लेगी। अगर ऐसा होता है तो 2029 से पहले बिहार की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है। इन्हीं सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः तमिलनाडु में राहुल गांधी ने विजय के साथ गठबंधन कर क्या मैसेज दिया? जवाबः 4 मई को आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद कांग्रेस ने दशकों पुराने साथी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) का साथ छोड़ दिया। राहुल गांधी ने अपने पांचों विधायकों का समर्थन अभिनेता से नेता बने थालापति विजय को दे दिया। राहुल गांधी का DMK जैसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगी को छोड़ना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। TVK (तमिलगा वेट्टी कड़गम) के साथ जाने का राहुल गांधी का यह फैसला बता रहा है कि वह अब घिसे-पीटे नारों और मॉडल के आधार पर चल रही पार्टियों से अलग नए और बढ़ते हुए राजनीतिक चेहरों के साथ कदमताल करना चाहते हैं। राहुल गांधी शायद अब क्षेत्रीय क्षत्रपों के दबाव से मुक्त होकर नई, युवा और भविष्य की राजनीति की ओर देख रहे हैं। सवाल-2ः राहुल के इस फैसले का बिहार में क्या असर पड़ेगा? जवाबः बिहार में कांग्रेस और RJD (लालू-तेजस्वी) का रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन तमिलनाडु के फैसले का गहरा असर इस गठबंधन पर पड़ सकता है। बिहार कांग्रेस के नेता अलग होने का सुझाव दे चुके हैं सवाल-3ः कांग्रेस तेजस्वी का साथ क्यों छोड़ सकती है? जवाबः तेजस्वी का साथ छोड़ने के 3 बड़े कारण हैं… 1. सामाजिक न्याय का पुराना मॉडल फेल तेजस्वी यादव बीते 4-5 सालों में लगातार तमिलनाडु के सामाजिक न्याय के मॉडल को अपनाने की बातें करते रहे हैं। जातीय गणना से लेकर रिजर्वेशन का दायरा बढ़ाने की जमकर वकालत करते रहे हैं। अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक तेजस्वी यादव जब नीतीश सरकार में आए तो बिहार में जातीय गणना भी हुई। रिजर्वेशन का दायरा भी बढ़ा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इतने प्रयास के बावजूद 2025 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया। वहीं, तेजस्वी यादव जिस तमिलनाडु मॉडल को बिहार में लागू करने की बातें करते हैं, वह मॉडल उसी राज्य में फेल हो गया। साथी स्टालिन की पार्टी DMK सत्ता से बाहर हो गई। एक्टर विजय ने स्टालिन से अलग सामाजिक न्याय का नया मॉडल पेश किया, जिसे लोगों ने स्वीकार किया है। तमिलनाडु: क्यों फेल हुआ ‘सामाजिक न्याय’ का पुराना मॉडल? 2. नहीं बढ़ रहा कांग्रेस का वोट बैंक 3. भ्रष्टाचार और जंगलराज का नैरेटिव सवाल-4: क्या 2029 से पहले कांग्रेस प्रशांत किशोर के साथ जाएगी? जवाबः हां, संभावना मजबूत है। कांग्रेस बिहार में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है और RJD की छाया से दूर जाना चाहती है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद दिसंबर 2025 में प्रशांत किशोर की कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से दो घंटे तक मुलाकात हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से बिहार और देश में विपक्ष की राजनीति पर बातें हुईं थी। मुद्दों पर भी बातें हुईं थी। कांग्रेस जानती है कि प्रशांत किशोर रणनीतिकार हैं, जो कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकते हैं। चुनाव में कांग्रेस को लेकर सॉफ्ट थे प्रशांत किशोर प्रशांत किशोर के साथ आने की संभावना क्यों मजबूत है सवाल-5: बिहार में सत्ता चाहिए तो तेजस्वी को क्या करना होगा? जवाबः तेजस्वी यादव अभी भी बिहार के सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD को सबसे ज्यादा वोट शेयर (करीब 23%) मिला, लेकिन सीटें सिर्फ 25 आईं। अगर उन्हें 2030 या उससे पहले सत्ता चाहिए तो पुरानी रणनीति से बाहर निकलना पड़ेगा। उनको 3 काम करने होंगे… 1. MY इक्वेशन से आगे निकलकर ब्रॉड कोएलिशन बनाना 2. जंगलराज के नैरेटिव को विकास की पॉलिटिक्स से खत्म करना होगा 3. मजबूत संगठन करना होगा

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *