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मदर्स डे के अवसर पर महर्षि दयानंद विद्यापीठ गोविंदपुरम की प्रधानाचार्य डॉ सीमा सेठी कहती हैं कि आज हम सभी मदर्स डे मना रहे हैं। जीवन में मां के योगदान को भूला नहीं जा सकता। यदि कोई भी बेटा बेटी सफल होते हैं तो इसमें परिवार से ज्यादा हर मां का योगदान होता है। आज तो संसाधन हैं, एक समय यह था कि हम भाई बहन पढ़ने जाते थे तो मां रात में ही ड्रेस के कपड़े धोया करतीं थीं। जब मैं 2 साल की थी, तभी पिता की डेथ हो गई, उसके बाद मां ने हमेशा पूरे परिवार को संभाला। घर संभालने के साथ होटल के बिजनेस को भी आगे बढ़ाया। मां ने दी अनुशासन की सीख गाजियाबाद के स्वर्ण जयंतीपुरम में रहने वाली डॉ सीमा सेठी कहतीं हैं कि 14 साल से मैं प्रधानाचार्य हैं। शिक्षा में आए मुझे 32 साल हो गए। मैं प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थी। आजादी के समय हमारा परिवार पाकिस्तान से इंडिया आया। वह कहतीं हैं कि मां सुषमा रानी गुजराल ने हमेशा अनुशासन की सीख दी। आज जो भी मैं हूं इसमें मेरी मां का योगदान है। मेरी मां अपने टाइम की समय 10 वीं पास थीं। आज तो बहुत महिलाएं बिजनेस चला रहीं हैं, लेकिन मेरी मां में एक अलग ही जज्बा था। प्रधानाचार्य सीमा सेठी के बेटे विराट सेठी लॉयर और बेटी सानिया सेठी पढ़ाई कर रहीं हैं। मम्मी ने हमेशा आगे बढ़ाया गुलमोहर एन्कलेव में रहने वालीं अंशिका चौधरी मनोवैज्ञानिक हैं। अंशिका बताती हैं कि मुझे मेरी मम्मी से बहुत कुछ सीखने को मिला। आज अपनी मम्मी रश्मि चौधरी के साथ मदर्स डे मनाया। वह कहतीं हैं कि स्कूल जाने से लेकर हर जिम्मेदारी तक मां का योगदान सबसे अधिक होता है। हर मां चाहतीं हैं कि मेरी बेटी या बेटा हमेशा आगे बढ़ें। मम्मी चाहतीं थीं बेटी अफसर बने यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर सोनिका राजोरिया ने अपनी मम्मी मिथलेश और भाभी दिव्या के साथ मदर्स डे बनाया। वह कहतीं हैं कि मां चाहतीं थीं कि बेटी वर्दी पहनकर पुलिस में भर्ती हों। मैंने पीसीएस की तैयारी की, लेकिन इसी दौरान मैं यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती हो गईं। जिसके बाद पीसीएस की तैयारी बीच में ही रह गई। सोनिका कहतीं हैं कि मेरी भाभी दिव्या भी बैंक में है, जिनकी इस समय अलीगढ़ में पोस्टिंग है।
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प्रधानाचार्य सीमा बोलीं- मां के जूनून से यहां तक पहुंचीं:पिता की याद तो नहीं, लेकिन मां ने हमेशा अनुशासन की सीख दी