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मुरादाबाद के केजीके कॉलेज की प्रबंध समिति की वैधता का विवाद अब उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर कोई असर न पड़े, इसके लिए शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) से भी दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। कॉलेज के प्रबंधक विवेक खन्ना ने पूर्व में प्राचार्य के अधिकार सीमित करते हुए प्रो. विनोद पांडेय को प्रशासनिक और प्रो. उपदेश चौहान को वित्तीय अधिकार सौंपे थे। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. डॉ. सुधीर कुमार ने इस आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद, आयोग द्वारा चयनित प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी ने कॉलेज की प्रबंध समिति की वैधता पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अशासकीय और निजी महाविद्यालयों की प्रबंध समितियां आमतौर पर ट्रस्ट या सोसायटी के माध्यम से संचालित होती हैं। अधिकारी के अनुसार, ट्रस्ट आधारित समितियों में पदाधिकारी स्थायी होते हैं और चुनाव नहीं होते, जबकि सोसायटी के तहत संचालित संस्थाओं में संविधान के अनुसार चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाती है। अब तक मिले दस्तावेजों के आधार पर, केजीके कॉलेज की प्रबंध समिति ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित होती प्रतीत हो रही है। समिति की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कुलपति से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। विश्वविद्यालय से जवाब प्राप्त होने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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केजीके कॉलेज प्रबंध समिति की वैधता पर विवाद गहराया:उच्च शिक्षा विभाग ने कुलपति से मांगी रिपोर्ट