एक्सप्रेसवे और औद्योगिक क्लस्टर बने सामाजिक बदलाव के हथियार:पलायन की मजबूरी खत्म, अब गांव की चौखट पर मिल रहा रोजगार


उत्तर प्रदेश आज एक ऐसी ‘सभ्यतागत घटना’ का साक्षी बन रहा है, जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ का सपना जमीन पर साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने अपनी उस पुरानी पहचान को पीछे छोड़ दिया है, जहां पलायन को नियति और पिछड़ेपन को पहचान मान लिया गया था। आज यूपी केवल कंक्रीट के एक्सप्रेसवे नहीं बना रहा, बल्कि समावेशी विकास की एक ऐसी इमारत खड़ी कर रहा है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में उजाला ला रही है। 2017 में ‘बीमारू’ राज्य कहलाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर सबसे तेज धावक बनकर उभरा है। बुंदेलखंड की बदली पहचान: वीरभूमि अब शक्ति का केंद्र दशकों तक सूखे और पलायन की त्रासदी झेलने वाला बुंदेलखंड अब नई औद्योगिक क्रांति का गवाह है। आगरा से चित्रकूट तक फैला ‘डिफेंस कॉरिडोर’ केवल हथियारों के कारखाने की योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकल्प है। झांसी, जहां कभी रानी लक्ष्मीबाई ने शौर्य की गाथा लिखी थी, आज फिर से एक नई शक्ति का केंद्र बन रही है। इस कॉरिडोर के जरिए हजारों करोड़ का निवेश और 50 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार आने का अनुमान है। जब बुंदेलखंड का युवा अपने घर में रहकर काम करता है, तो यह केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक सामाजिक पुनर्जन्म है। गांव की आत्मा और आर्थिक आत्मनिर्भरता योगी सरकार ने गांवों की आर्थिक शक्ति को पहचानने के लिए ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी योजना लागू की, जिससे एक करोड़ से अधिक कारीगर लाभान्वित हो रहे हैं। वाराणसी का बुनकर हो या मुरादाबाद का पीतल शिल्पी, आज वे ई-कॉमर्स के जरिए दुनिया से जुड़े हैं। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे ने दूरियों को खत्म कर दिया है। आज आजमगढ़ या मऊ के युवक को काम के लिए सूरत या मुंबई जाने की मजबूरी नहीं है। जेवर एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, टॉय पार्क और गारमेंट पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत कर रहे हैं। सामाजिक लोकतंत्र और डिजिटल क्रांति नोएडा और ग्रेटर नोएडा आज सैमसंग, ओप्पो और वीवो जैसी कंपनियों की मौजूदगी से दुनिया के बड़े मोबाइल हब बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे असली ताकत वे हजारों छोटे उद्यमी हैं, जो इन बड़ी कंपनियों के लिए कल-पुर्जे बना रहे हैं। डॉ. अंबेडकर के ‘सामाजिक लोकतंत्र’ के सपने को सच करते हुए योगी सरकार ने डेटा सेंटर पार्कों के जरिए डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव रखी है। हस्तशिल्प निर्यात में यूपी की 40% हिस्सेदारी उन लाखों हाथों की गरिमा का प्रतीक है, जिन्होंने पीढ़ियों से अपनी कला को जीवित रखा है। सुशासन से बढ़ा नागरिकों का विश्वास सुशासन का मतलब केवल कागजी आंकड़े नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार में कमी और पारदर्शिता है। ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बेहतर रैंकिंग ने नागरिकों का भरोसा जीता है। दादरी में बन रहा एशिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क किसानों की उपज को समय पर बाजार तक पहुंचा रहा है। उत्तर प्रदेश अब समस्याओं का प्रदेश नहीं, बल्कि समाधान का मॉडल बन चुका है। इतिहास इस दौर को महज एक आर्थिक उछाल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सभ्यतागत पुनर्जागरण कहेगा।

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