यूपी रेरा में अब नहीं चलेगी फर्जीवाड़े की चाल::AI पकड़ेगा नक्शे में छेड़छाड़, डायरेक्टर का असली नाम खुद निकलेगा


यूपी रेरा अब प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित बनाने जा रहा है। आने वाले समय में बिल्डर न तो मानचित्र में छेड़छाड़ कर सकेंगे और न ही कंपनी के असली डायरेक्टर का नाम छिपा पाएंगे। इसके लिए यूपी रेरा अपने पोर्टल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस करने जा रहा है। साथ ही चैटबॉट और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किए जाएंगे। यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने बताया कि इन नई सुविधाओं का लोकार्पण अगले साल जनवरी में किया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रोजेक्ट और उससे जुड़े डेवलपर की जानकारी कुछ ही सेकेंड में मिल सकेगी। इससे घर खरीदारों और निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब डेवलपर नहीं बदल सकेंगे नक्शा अभी तक कई डेवलपर विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराने के बाद उसमें बदलाव कर रेरा पोर्टल पर अपलोड कर देते थे। नई व्यवस्था में बिल्डर को सिर्फ परमिट नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद रेरा पोर्टल सीधे विकास प्राधिकरण या OBPAS पोर्टल से स्वीकृत मानचित्र प्राप्त करेगा। इससे नक्शे में टेंपरिंग की संभावना खत्म हो जाएगी। MCA पोर्टल से सीधे आएगा डायरेक्टर का नाम यूपी रेरा ने कंपनियों के डायरेक्टर की जानकारी भी अब सीधे कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय (MCA) के पोर्टल से लेने का फैसला किया है। अभी कुछ कंपनियां रेरा में अलग नाम दर्ज कराती थीं ताकि कार्रवाई होने पर असली डायरेक्टर बच सके। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह संभव नहीं होगा। ऐप से घर बैठे होगी सुनवाई रेरा मोबाइल ऐप लॉन्च होने के बाद आवंटियों के लिए शिकायत दर्ज करना और सुनवाई में शामिल होना आसान हो जाएगा। ऐप पर ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक उपलब्ध रहेगा, जिससे आवंटी कहीं से भी ऑनलाइन सुनवाई में हिस्सा ले सकेंगे। 9 साल पूरे होने पर गिनाईं उपलब्धियां रेरा के नौ साल पूरे होने पर चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने 2017 से अप्रैल 2026 तक रजिस्टर हुए प्रोजेक्ट और शिकायतों के निस्तारण से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा कि AI आधारित व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और घर खरीदारों के हित अधिक सुरक्षित होंगे।

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