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यह साढ़े बारह और एक बजे के बीच का समय था। हम सभी सोए हुए थे। अचानक शोर सुनकर सभी की आंख खुल गई। देखा तो आग लग रही थी। घर के मुख्य गेट के सामने जितना सामान रखा था, सभी जल रहा था। जल्दी जल्दी मैने अपने पापा को फोन किया और आग लगने की जानकारी दी। जब तक पापा आते, तब तक सभी बेहोश हो चुके थे। इसके बाद आंख अस्पताल में आकर खुली…! यह कहना है कि रोशनपुर डोरली में हुए अग्निकांड के पीड़ित आशु का। जिस वक्त आग लगी आशु अपने परिवार के साथ अंदर ही मौजूद थे। देखते ही देखते आग ने विक्राल रूप ले लिया और पूरे घर में फैलती चली गई। आशु की मानें तो आंगन तक आग फैल चुकी थी, जिस कारण वह छत पर भी नहीं भाग सके। देखते ही देखते एक एक करके सभी बेहोश होने शुरु हो गए। पहले जानते हैं पूरी घटना को रोशनपुर डोरली में सतीश का मकान है, जिसे उन्होंने तीन परिवारों को किराए पर दिया हुआ है। सबसे आगे के हिस्से में बनीं दो दुकान कृष्णपाल के पास थीं जो टेंट का काम करते हैं। अंदर के कमरों में एक परिवार संजय तो दूसरा सागर का रह रहा था। रविवार आधी रात को मकान में आग लग गई। मशक्कत के बाद अंदर फंसे सभी 12 लोगों को निकालकर अस्पताल भिजवाया गया लेकिन तब तक सागर व उसकी बेटी शिवानी की दम घुटने से मौत हो गई। सभी का अस्पताल में चल रहा उपचार
जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, उनमें कांति पत्नी भूषण गिरी, ज्योति पत्नी सागर, शिव पुत्र सागर, करन पुत्र सागर, सरिता पत्नी संजय, आशु पुत्र संजय, प्रिंस पुत्र संजय, करन पुत्र संजय, भावना पुत्री संजय के अलावा अरुण पुत्र रोहताश शामिल हैं। इन सभी की हालत में सुधार बताया जा रहा है लेकिन एहतियात के तौर पर सभी को अस्पताल में ही रखा गया है। कांता ने बचाई दोनों परिवारों की जान
आग लगने के बाद जो सबसे पहले जगा वह थीं कांता। आग की दुर्गंध और तपिश का एहसास पाकर आंख खुली तो वह उठकर बाहर की तरफ आई। बाहर का नजारा देखकर वह जोर जोर से चिल्लाने लगीं। इसके बाद अंदर सो रहा हर एक शख्स उठ गया और खुद को बचाने की जद्दोजहद में जुट गया। हवा ने मोड़ दिया आग का रुख हादसे का शिकार बने प्रिंस का कहना है कि उन्होंने जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ दी थी। वह बचकर निकलने का हर रास्ता खो चुके थे। बाहर झांककर देखा तो आंधी से आग व धुआं घर से बाहर निकलने के बजाए हवा से अंदर की तरफ ही आ रहा था। देखते ही देखते काला धुआं घर में घुस गया और इसके बाद वह सभी बेहोश होते चले गए। ऐसा लगा, मानों सबकुछ खो दूंगा हादसे के वक्त संजय घर से बाहर थे। उनकी एक बेटी भी उनके साथ थी। आशु ने फोन किया तो वह दौड़े दौड़े रोशनपुर डोरली पहुंच गए। पूरा घर आग की लपटों से घिरा था। संजय बताते हैं कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि अब सब खत्म हो जाएगा। क्योंकि फायर ब्रिगेड तब तक आई नहीं थी। आस पास के लोग प्रयास कर रहे थे। कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड पहुंची और बचाव कार्य शुरु किया। संजय कहते हैं कि वह मंजर याद कर दिल सहम जाता है।
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आशु बोला- बचकर भागते तो कहां, हर तरफ आग थी:अस्पताल में भर्ती पीड़ितों ने सुनाई आपबीती, पंद्रह मिनट तक जिंदगी के लिए की जंग