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मेरठ के खरखोदा क्षेत्र में रविवार को भगवान परशुराम की शोभायात्रा को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। पुलिस प्रशासन ने यात्रा को बीच में ही रोक दिया, जिससे हिंदू संगठनों के लोगों ने हंगामा किया और भेदभाव का आरोप लगाया। यह शोभायात्रा जनता इंटर कॉलेज, खरखोदा से शुरू होकर खासपुर, बवनपुरा, अतराडा होते हुए दुर्गा मंदिर पर समाप्त होनी थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। शोभायात्रा के आगे बढ़ते ही सीओ किठौर प्रमोद कुमार सिंह ने भारी पुलिस बल के साथ इसे रुकवा दिया। पुलिस का कहना था कि शोभायात्रा के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि आयोजक बिना परमिशन के ही यात्रा निकाल रहे थे। इस दौरान शोभायात्रा में शामिल बजरंग दल के प्रांत संयोजक निमिष वशिष्ठ और विश्व हिंदू परिषद के संजय त्यागी सहित अन्य लोगों ने पुलिस के इस कदम का विरोध किया। उनकी पुलिस से तीखी नोंकझोक भी हुई। उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि यह कोई निजी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरागत शोभायात्रा है, जिसे हर वर्ष शांतिपूर्वक निकाला जाता है। आयोजकों ने आरोप लगाया कि शोभायात्रा को रोककर हिंदू समाज के धार्मिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सहयोग करना चाहिए था, न कि इस प्रकार बीच में हस्तक्षेप करना चाहिए। वहीं, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का जुलूस या कार्यक्रम निकालना नियमों के विरुद्ध है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि पुलिस की सतर्कता के चलते हालात नियंत्रण में रहे। सीओ किठौर ने बताया कि शोभायात्रा बिना परमिशन के निकाली जा रही थी। उन्होंने कहा कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शोभायात्रा को रोका गया है और परमिशन मिलने के बाद पुलिस प्रशासन इसे निकालने में सहयोग करेगा।
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मेरठ में परशुराम शोभायात्रा रोकी गई, हिंदू संगठनों का विरोध:पुलिस ने बिना अनुमति का हवाला दिया, भेदभाव का आरोप