3 साल जेल काटने वाला कोच बरी:पानीपत में नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी ने किया था सुसाइड; पिता ने सेक्सुअल असॉल्ट के आरोप लगाए थे


पानीपत की फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) कोर्ट ने नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी को सुसाइड के लिए उकसाने और सेक्सुअल असॉल्ट के आरोपी कोच को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला सबूतों और गवाहों के बयानों में अंतर के आधार पर सुनाया। कोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ यौन शोषण, रेप या आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई ठोस और कानूनी साक्ष्य सामने नहीं आया। कोच के एडवोकेट ने बताया कि मामले में उनका क्लाइंट करीब 3 साल 8 दिन तक न्यायिक हिरासत में जेल में भी रहा। अब सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… 21 मई 2023 को नाबालिग ने किया था सुसाइड मामला 21 मई 2023 का है। पानीपत स्थित अपने घर में 11वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था। घटना के बाद उसके पिता ने शुरुआत में मानसिक तनाव को आत्महत्या का कारण बताया था। उन्होंने किसी पर शक भी नहीं जताया था। इसके बाद पुलिस ने इत्तेफाकिया कार्रवाई की। अगले दिन पिता ने कोच पर लगाए आरोप घटना के अगले दिन मृतका के पिता ने पुलिस को शिकायत दी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के बैडमिंटन कोच अमित मलिक ने उस पर मानसिक दबाव बनाया था। पुलिस ने शुरुआती प्राथमिक जांच के बाद मामला दर्ज किया। बाद में मृतका की बड़ी बहन के बयानों के आधार पर केस में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। इनमें पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 305 और 376 शामिल थीं। अब जानिए कोच के एडवोकेट ने क्या बताया…. कोर्ट में जांच को लेकर सवाल उठे कोच अमित मलिक के एडवोकेट तरुण शर्मा और राहुल कक्कड़ ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस जांच के तरीके पर सवाल उठाए। जांच के दौरान मृतका की बहन ने ‘वीर’ नाम के एक अन्य लड़के पर भी उसे परेशान करने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने उसे जांच में शामिल नहीं किया। कोर्ट में घर, बैडमिंटन एकेडमी और होटलों के CCTV फुटेज भी पेश किए गए। इन फुटेज में अमित की ओर से किसी गलत आचरण या यौन उत्पीड़न का कोई प्रमाण नहीं मिला। मुख्य गवाह ने भी नहीं देखा था शारीरिक संबंध बनाते एडवोकेट तरुण शर्मा के मुताबिक, मृतका की बड़ी बहन इस मामले में मुख्य गवाह थी। उसने कोर्ट में स्वीकार किया कि उसने अमित को कभी अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए नहीं देखा। कोर्ट ने यह भी देखा कि टूर्नामेंट के दौरान कोच की अपनी बेटी और परिवार का ड्राइवर भी साथ रहते थे। इसके बावजूद किसी ने आरोपी की ओर से किसी संदिग्ध गतिविधि की बात नहीं कही। घटना के बाद आरोपी को घर बुलाया एडवोकेट ने बताया कि कोर्ट ने घटना के बाद के व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना। घटना के बाद मृतका की बहन ने खुद अमित को अपने घर बुलाया था। दोनों ने सामान्य रूप से बैठकर बातचीत भी की थी। कोर्ट ने इसे मामले के अन्य तथ्यों के साथ महत्वपूर्ण माना। मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों की भी जांच की गई। इनमें जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हो सकी। कोर्ट ने सभी आरोपों से किया बरी तरुण शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने आयु निर्धारण के मापदंडों के आधार पर माना कि घटना के समय मृतका की उम्र 16 वर्ष से कम थी और वह नाबालिग थी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि अमित के खिलाफ यौन शोषण, रेप या आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई ठोस और कानूनी साक्ष्य सिद्ध नहीं हुआ। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने अमित मलिक को धारा 305, 376(3), 376(2)(n) IPC और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 व 10 के तहत लगे सभी आरोपों से पूरी तरह बरी करने का आदेश दिया।

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