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गोरखपुर के दक्षिणांचल में स्थित विधानसभा क्षेत्र चिल्लूपार में इस समय सियासी पारा हाई है। पिछले कई वर्षों से भाजपा में टिकट के लिए जोर-आजमाइश कर रही अस्मिता चंद ने अब भगवा पट्टा उतारकर नीला दुपट्टा ओढ़ लिया है। अब बसपा के बैनर तले वह 24 अगस्त को कार्यकर्ता महसम्मेलन करने जा रही हैं। इसके जरिए वह चिल्लूपार में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। महासम्मेलन तो बसपा का कार्यक्रम है लेकिन इससे प्रतिष्ठा अस्मिता चंद की जुड़ी है। यही कारण है कि अस्मिता चंद के परिवार ने यहां भारी भीड़ जुटाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।
इस महासम्मेलन को चिल्लूपार में ‘बदलाव’ के शंखनाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। गोला के वीएसएवी कॉलेज में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में पार्टी का कोई बड़ा पदाधिकारी शामिल हो सकता है। इसी मंच से अस्मिता चंद को आधिकारिक रूप से प्रभारी बनाने की घोषणा भी हो सकती है। क्षेत्र में बढ़ाया दौरा, घर-घर पहुंच रहीं इस कार्यकर्ता महासम्मेलन को अस्मिता चंद और उनके परिवार ने काफी गंभीरता से लिया है। जब से यह तिथि तय हुई है, इस परिवार ने अपना दौरा बढ़ा दिया है। घर-घर पहुंचने का प्रयास है। भारी भीड़ जुटाने की तैयारी है, जिससे नई पार्टी में आगाज धमाकेदार हो। हाल ही में मुख्य मंडल प्रभारी की मौजूदगी में तैयारी को लेकर बैठक भी की गई। इसमें कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। सभी को इस महासम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने को कहा गया है। महासम्मेलन का समय सुबह 10 बजे का रखा गया है। पहले ही जाहिर कर दिया था इरादा 2022 का चुनाव बीतने के साथ ही अस्मिता चंद मैदान में उतरने को लेकर तैयार थीं। लगभग एक साल से उन्होंने अपना इरादा सार्वजनिक कर दिया। अपनी गाड़ी पर यह बैनर लगा दिया कि “चिल्लूपार दिखाएगा दम, 2027 लड़ेंगे हम”। उस वक्त सारा प्रयास भाजपा में चल रहा था। लेकिन जब यहां टिकट पाने की उम्मीद नहीं रह गई तो उन्होंने अपना रास्ता अलग कर लिया। जिस समय उन्होंने पार्टी छोड़ी, वह भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष थीं। जब से अस्मिता चंद हाथी पर सवार हुई हैं, पूरे चिल्लूपार की निगाहें 24 अगस्त को होने वाले बसपा के कार्यकर्ता महासम्मेलन पर टिकी हैं। उनके आने से इस क्षेत्र के बसपा कार्यकर्ता भी उत्साहित हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत दलित वोटर हैं।
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24 अगस्त को चिल्लूपार में अस्मिता दिखाएंगी ताकत:किसी परीक्षा से कम नहीं होगी कार्यकर्ता महासम्मेलन की सफलता