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वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब घट रहा है। इसके साथ वरुणा का बाढ़ का पानी भी धीरे-धीरे उतरने लगा है। लेकिन बाढ़ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। बाढ़ की चपेट में सिर्फ घर और लोग ही नहीं आए हैं, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। कई स्कूलों में पानी भरने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। तो कहीं घर की जिम्मेदारियों ने बच्चों को रोक लिया है। एमबीएस पब्लिक स्कूल की छठवीं की छात्रा सुकुमारी ने बताया कि 15 दिन से स्कूल नहीं गई है। नूराफरीन और दीपक ने भी कहा कि स्कूल में बाढ़ का पानी भरा है, इसलिए पढ़ाई रुक गई है। वहीं, चित्रकूट इंटर कॉलेज की छात्रा अंकिता जैसल बाढ़ राहत शिविर में रह रही है। उसने कहा- 8 दिन से स्कूल नहीं गई, क्योंकि उसका जूता घर पर छूट गया है। अभिभावकों का कहना है कि अगर स्कूल में पढ़ाई नहीं हो रही है तो कोई दूसरी व्यवस्था की जानी चाहिए थी। ऑनलाइन पढ़ाई होनी चाहिए थी। 15 दिन से स्कूल नहीं गई सुकुमारी एमबीएस पब्लिक स्कूल की छठवीं कक्षा की छात्रा सुकुमारी ने बताया कि स्कूल में पानी भर गया है। पढ़ाई की कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है। करीब 15 दिन से स्कूल नहीं गई है और पढ़ाई भी नहीं हो रही है। बाढ़ से स्कूल डूबा, पढ़ाई हुई प्रभावित इसी स्कूल की पांचवीं की छात्रा नूराफरीन ने बताया कि बाढ़ की वजह से स्कूल में पानी भर गया है। इसलिए स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। पांचवीं के छात्र दीपक ने बताया कि बाढ़ आने के बाद से स्कूल नहीं जा पा रहा है। स्कूल में पानी भरा हुआ है। स्कूल बंद, घर में छूटा जूता तो नहीं जा पाई क्लास चित्रकूट इंटर कॉलेज की चौथी कक्षा की छात्रा अंकिता जैसल फिलहाल इसी स्कूल में बने बाढ़ राहत शिविर में रह रही है। उसने बताया कि 8 दिन से बाढ़ है और वह स्कूल नहीं गई है। उसका जूता घर पर छूट गया है, इसलिए क्लास अटेंड नहीं कर पाई। सामान खाली करना है, इसलिए आज स्कूल नहीं गई लाड़ो ने बताया कि वह रोज स्कूल जाती है। लेकिन आज घर का सामान खाली करना है, इसलिए स्कूल नहीं जा पा रही है। मां बोलीं- मास्टर पढ़ाएंगे तभी बच्चे जाएंगे राहत शिविर में रह रही सन्नों देवी ने कहा कि पानी भरने से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। जब शिक्षक पढ़ाएंगे तभी बच्चे स्कूल जाएंगे। ऐसी स्थिति में शिक्षकों को पढ़ाई की व्यवस्था करनी चाहिए। अगर मोबाइल से पढ़ाई कराई जाती तो बच्चे मोबाइल से भी पढ़ सकते थे। राहत शिविर में रात में बच्चों को पढ़ाया जा रहा चित्रकूट इंटर कॉलेज में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि रात में बच्चों को पढ़ाया जाता है। वहीं स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल के चार कमरों में राहत शिविर बनाया गया है। बाकी कक्षाएं चल रही हैं। हालांकि बच्चों की संख्या जरूर कम हुई है। 20 प्राथमिक स्कूलों में बने राहत शिविर बेसिक जिला शिक्षा अधिकारी भोपालेंद्र ने बताया कि 20 प्राथमिक स्कूलों में राहत शिविर बनाए गए हैं। सभी स्कूलों में एक-एक शिक्षक भी तैनात किया गया है, जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं। 11 मोहल्लों के 1,388 लोग प्रभावित वरुणा में बाढ़ से करीब 11 मोहल्ले प्रभावित हुए हैं। इनमें 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित हैं। इनमें से 219 परिवारों के 935 लोग 13 राहत शिविरों में रह रहे हैं।
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स्कूल में पानी भरा तो कैसे जाएं पढ़ने:बच्चे बोले- 15 दिन से नहीं गए स्कूल, किसी की पढ़ाई बंद तो किसी का जूता घर में छूटा