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राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागार में रविवार को साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा लगा। मौका था साहित्यकार प्रेम प्रकाश राय की नई काव्य कृति ‘चाँद हुआ नाराज़’ के विमोचन का। इस संग्रह में कवि ने समाज के बदलते स्वरूप, राजनीति पर तीखे कटाक्ष और मानवीय संवेदनाओं को बेहद सरल शब्दों में पिरोया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. हरिशंकर मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि कविताएँ समाज का आईना होती हैं और यह पुस्तक उस कसौटी पर खरी उतरती है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईआरएस पंकज के. सिंह मौजूद रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. जे.पी तिवारी ने शिरकत की। बेटी से लेकर पड़ोसी मुल्क तक की बात समीक्षक सुबोध कुमार दुबे ने पुस्तक पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि प्रेम प्रकाश राय की लेखनी में विविधता दिखाई देती है। उन्होंने ‘पराया धन बेटी’ और ‘नारी के सोलह श्रृंगार’ जैसी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता व्यक्त की है। वहीं ‘पड़ोसी मुल्क को सीख’ जैसी कविताओं के जरिए देशप्रेम का जज्बा भी झलकता है। इन रचनाओं की रही खास चर्चा लोकार्पण के दौरान पुस्तक की कई प्रमुख कविताओं पर विशेष चर्चा हुई।रचना को आराधना : कला और भक्ति का अनूठा संगम।कोरोना काल का दर्द : महामारी के दौरान बने हालातों का मार्मिक चित्रण।सियासी कटाक्ष : राजनीति की विसंगतियों पर तीखा प्रहार। कार्यक्रम का संचालन आचार्य केसरी प्रसाद शुक्ला ने किया। अपनी चिर-परिचित शैली से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा। अंत में उपस्थित अतिथियों ने प्रेम प्रकाश राय को इस नई कृति के लिए बधाई देते हुए इसे साहित्य जगत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
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साहित्यकार प्रेम प्रकाश राय की नई काव्य कृति का लोकार्पण:लखनऊ में 'चाँद हुआ नाराज़' का विमोचन, समाज राजनीति पर तीखे कटाक्ष