![]()
सहारनपुर में देवबंदी उलेमा मुफ़्ती असद क़ासमी ने मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इस व्यवस्था को सुधार, पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम बताया। मुफ़्ती क़ासमी के अनुसार, बायोमेट्रिक हाजिरी लागू होने से संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छी पहल है, जिससे हाजिरी में पारदर्शिता आएगी और संस्थानों में समयबद्ध तरीके से कार्य करने की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। किसी भी संस्थान की बेहतर व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी बेहद जरूरी होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक सिस्टम को केवल मदरसों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे सभी सरकारी संस्थानों, जैसे सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और अन्य विभागों में भी लागू किया जाना चाहिए, जहां सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। मुफ़्ती असद क़ासमी ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से उपस्थिति दर्ज होने से फर्जी हाजिरी और लापरवाही जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, साथ ही संस्थानों में अनुशासन का माहौल मजबूत होगा। उन्होंने सरकार की इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह जनहित और संस्थानों के सुधार के लिए उठाया गया एक सराहनीय कदम है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और संस्थानों की कार्यप्रणाली पहले से बेहतर होगी। मुफ़्ती क़ासमी ने अंत में कहा कि यदि इस व्यवस्था को सभी सरकारी विभागों में समान रूप से लागू किया जाता है, तो इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।
Source link
सहारनपुर उलेमा ने मदरसों में बायोमेट्रिक हाजिरी का किया स्वागत:मुफ़्ती असद क़ासमी बोले- सरकारी संस्थानों में भी लागू हो यह सिस्टम