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रामचरितमानस के अप्रतिम व्याख्याता युगतुलसी की उपाधि से विभूषित पद्मश्री पंडित रामकिंकर उपाध्याय महाराज का रविवार को निर्वाण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 21 वैदिक आचार्यों के निर्देशन में अनुष्ठान के साथ महाराज श्री की कृपामूर्ति का षोडशोपचार पूजन व अभिषेक कर आरती उतारी गयी। इसके साथ ही मानस की चौपाई ‘अजर अमर गुणनिधि सुत होऊ.. ‘ के सम्पुट के साथ सुंदरकांड का संगीतमय पारायण भी किया गया।पंचमुखी हनुमान का अभिषेक पूजन के साथ सुंदरकांड का सामूहिक पाठ हुआ।पुनः भंडारे के साथ बटुक ब्रह्मचारियों का सम्मान एवं वस्त्रादि का वितरण भी किया गया। इसके साथ ही सायंकालीन बेला एक हजार दीप प्रज्ज्वलित कर प्रकाशोत्सव का आयोजन किया गया। महाराजश्री का असाधारण व्यक्तित्व ही उन्हें अवतारी पुरुष बनाता है
वहीं गोष्ठी में भक्तों ने गुरुदेव का स्मरण कर अपनी भाव सुमन अर्पित की गई। इस गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उनकी उत्तराधिकारिणी एवं रामायणम् ट्रस्ट की अध्यक्ष व रामकथा की अन्तर्राष्ट्रीय प्रवक्ता साध्वी मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि महाराजश्री का असाधारण व्यक्तित्व ही उन्हें अवतारी पुरुष बनाता है। रामचरितमानस के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास महाराज द्वारा रचित रामचरितमानस के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि महाराजश्री ने वाचिक परम्परा में भक्ति की सुरसरि प्रवाहित की। उसके साथ ही अपनी रचनाओं से भी समाज का मार्ग दर्शन किया। कहा गया कि साहित्य से ही संस्कृति की रक्षा संभव है जो युगो-युगों तक पीढ़ियों को पथ प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि महाराज श्री के लीला संलरण के उपरांत उनकी चेतना का अधिक विस्तार हुआ है। आश्रम में उनकी सूक्ष्म उपस्थिति का आभास निरन्तर मिलता और समय-समय पर अपने अनुयायियों का संकटमोचक बनकर उन पर अपनी कृपादृष्टि भी डालते है।
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समारोह पूर्वक मनाया गया युगतुलसी पंडित रामिंककर का निर्वाण दिवस:रामायणम् आश्रम में कृपामूर्ति का अभिषेक – पूजन और प्रकाशोत्सव सहित गोष्ठी हुई