विमलेश हत्याकांड में 3 संदिग्धों का होगा नार्को-पॉलीग्राफ टेस्ट:सुल्तानपुर में सीजेएम कोर्ट ने SC के गाइड लाइन के तहत अनुमति दिया


सुल्तानपुर में 9 मई को हुई महिला की हत्या के मामले में जांच अब वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ेगी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नवनीत सिंह की अदालत ने तीन संदिग्धों के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने की अनुमति दे दी है। खास बात यह है कि जांच अधिकारी के साथ-साथ तीनों संदिग्धों ने भी स्वयं अदालत में आवेदन देकर जांच में सहयोग की इच्छा जताई थी। मामला बधुआकला थाना क्षेत्र के गड़ी गांव का है। पढ़िए पूरा मामला… लंगड़ी गांव में 9 मई की देर शाम विमलेश सिंह (65) की गला काटकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतका के भाई गंगा प्रकाश सिंह, निवासी मडेरिका-सरुवांवा, थाना मुंशीगंज (अमेठी), ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना कर रहे अधिकारी प्रमोद कुमार पटेल ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर तीन संदिग्धों के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की अनुमति के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप परीक्षण कराने की अनुमति प्रदान कर दी। विवेचना के दौरान मृतका के पति चंद्रशेखर सिंह के बयान में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई थीं। उनके अनुसार, गांव निवासी समरभीम उर्फ लल्लू कोरी उनके यहां मजदूरी का काम करता था। वहीं गांव के अजय कोरी से डेयरी पर दूध भेजने को लेकर विमलेश सिंह की कहासुनी हुई थी। जांच के दौरान तीसरे संदिग्ध के रूप में देवलपुर निवासी राज बहादुर सिंह का नाम भी सामने आया। बताया गया कि मृतका ने उन्हें ब्याज पर तीन हजार रुपये दिए थे और रकम वापस न मिलने को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। तथ्यों और बयानों को विवेचना का हिस्सा बनाया इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर विवेचक ने तीनों व्यक्तियों को नोटिस जारी किया था और जांच में सहयोग के लिए सहमति मांगी थी। इसके बाद तीनों संदिग्धों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में आवेदन देकर कहा कि वे निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करना चाहते हैं और पॉलीग्राफ तथा नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं। सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने मामले में सशर्त अनुमति प्रदान करते हुए जांच अधिकारी को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि परीक्षण के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और बयानों को विवेचना का हिस्सा बनाया जा सकता है तथा उनका उपयोग जांच को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिक जांच के इन तरीकों से मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता आने की उम्मीद है। अब परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जांच की दिशा और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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