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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला एकेडमी के बीच सोमवार को एक MoU हुआ। इस समझौते से कला, संस्कृति और शोध को बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन और एकेडमी के सचिव ने सिग्नेचर किए। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच कला, डिजाइन, भारतीय संस्कृति और पुरानी विरासत के क्षेत्र में लंबे समय तक मिलकर काम करना है। इसके तहत दोनों संस्थान साथ मिलकर आर्ट-क्राफ्ट कैंप, प्रदर्शनियां, वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन करेंगे। एकेडमी बाहर से आने वाले कलाकारों, डिजाइनरों और टीचरों के आने-जाने का किराया, फीस और बाकी जरूरी खर्चे में सहयोग देगी। साथ ही साथ ही संयुक्त रूप से संपादित पुस्तकों के प्रकाशन की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। छात्रों की कलात्मक प्रतिभा को नया मंच मिलेगा कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि इस कदम से छात्रों की कलात्मक प्रतिभा को नया मंच मिलेगा और पूर्वांचल के पारंपरिक कपड़ों, कला और हस्तशिल्प को बचाने में मदद मिलेगी। इससे शिक्षकों और छात्रों को रिसर्च और फील्ड स्टडी के नए मौके मिलेंगे। 3 साल के लिए हुआ समझौता
ललित कला व संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे ने बताया कि यह समझौता शुरुआत में तीन साल के लिए किया गया है, जिसे बाद में आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। काम की सही निगरानी के लिए दोनों तरफ से कोऑर्डिनेटर बनाए जाएंगे, जो हर साल काम की समीक्षा करेंगे। इस मौके पर डॉ. मनीष पाण्डेय, डॉ. गौरीशंकर चौहान, डॉ. प्रदीप साहनी और डॉ. प्रदीप राजोरिया समेत कई अफसर मौजूद रहे।
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लोककला और हस्तशिल्प को मिलेगा वैश्विक मंच:DDU और राज्य ललित कला एकेडमी के MoU