लखनऊ- होम्योपैथिक डॉक्टरों के लिए नए नियम लागू:फर्जी डिग्री पर अब नहीं मिलेगा पंजीकरण, क्वालिफिकेशन लिस्ट से सत्यापन होगा अनिवार्य


लखनऊ में होम्योपैथिक डॉक्टरों के पंजीकरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) ने नए नियम लागू किए हैं। बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन फॉर होम्योपैथी ने सभी राज्यों के होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रारों को निर्देश जारी किए हैं कि अब मेडिकल क्वालिफिकेशन रिकग्निशन लिस्ट (एमक्यूआरएल) का सत्यापन किए बिना किसी भी अभ्यर्थी का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। फर्जीवाड़े रोकने पर जोर उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड ने भी नए नियमों के तहत पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के रजिस्ट्रार विनय कुमार तिवारी ने बताया कि नए नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना खत्म की जा सके। अब दस्तावेजों का सत्यापन और पात्रता की गहन जांच के बाद ही पंजीकरण किया जाएगा। यूपी में 40 हजार होम्योपैथिक डॉक्टर उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 40 हजार होम्योपैथिक डॉक्टर पंजीकृत हैं। नए नियमों के अनुसार पंजीकरण के लिए अभ्यर्थी के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएचएमएस की डिग्री, एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी होने का प्रमाण और एमक्यूआरएल में नाम दर्ज होना जरूरी है। इन सभी शर्तों के पूरा होने के बाद ही पंजीकरण किया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध पंजीकरण के कोई भी होम्योपैथिक डॉक्टर चिकित्सा अभ्यास नहीं कर सकेगा। नए नियमों से फर्जी डिग्री के आधार पर पंजीकरण कराने की संभावना पर रोक लगेगी और व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

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