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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक आदेश को खारिज कर दिया है। इस आदेश के तहत हिन्दुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड (एचएएल) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ देने से इनकार किया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को ट्रस्ट नियमों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने सुनील कुमार मेहरोत्रा सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने ईपीएफओ द्वारा संयुक्त विकल्प (ज्वाइंट ऑप्शन) फॉर्म अस्वीकार करने के आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि जिन कर्मचारियों और नियोक्ताओं ने वास्तविक वेतन पर अंशदान जमा किया है, उन्हें उसी के अनुरूप अधिक पेंशन पाने का अधिकार होगा। केवल ट्रस्ट नियमों में तय 6500 रुपये की सीमा का हवाला देकर इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप सभी मामलों पर नए सिरे से विचार कर निर्णय लें। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से न्यायालय को बताया गया कि कर्मचारी पेंशन योजना-1995 एचएएल पर पूरी तरह लागू है। इसके तहत 8.33 प्रतिशत अंशदान वास्तविक वेतन पर जमा किया गया था, इसलिए उन्हें उच्च पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। दूसरी ओर, ईपीएफओ ने तर्क दिया कि एचएएल ट्रस्ट के नियमों में पेंशन योग्य वेतन की सीमा तय है और उसमें कोई संशोधन नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि ट्रस्ट के नियम कर्मचारी हित से जुड़े वैधानिक प्रावधानों से कम लाभकारी हैं, तो उन्हें प्रभावी नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की व्याख्या कर्मचारियों के हित में की जानी चाहिए।
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लखनऊ हाईकोर्ट ने ईपीएफओ का आदेश रद्द किया:एचएएल के सेवानिवृत्त कर्मियों को वास्तविक वेतन पर मिलेगी उच्च पेंशन