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लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. गिरि लाल गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ और डॉ. राम मनोहर लोहिया शोध पीठ के संयुक्त सहयोग से प्रो. आभा अवस्थी की स्मृति में किया गया। इस संगोष्ठी का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिकता’ था। संगोष्ठी में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. जेपी सैनी समेत देशभर के शिक्षाविदों ने विचार रखे। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जेआरएफ शोधार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया। ज्ञान प्रणाली के विऔपनिवेशीकरण पर चर्चा मुख्य वक्ता प्रो. मनोज जेना ने ज्ञान प्रणाली के विऔपनिवेशीकरण पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रचलित ज्ञान के स्वरूपों और उन पर औपनिवेशिक प्रभावों को समझने के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है। विशिष्ट अतिथि प्रो. जया श्रीवास्तव ने प्रो. आभा अवस्थी से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने अकादमिक चिंतन में ज्ञान के स्वदेशीकरण पर फोकस किया। प्रो. नीतू सिंह ने विश्व सभ्यता के विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखें। प्रो. आभा अवस्थी के योगदान को किया याद प्रो. सत्येंद्र त्रिपाठी ने हार्वर्ड, शिकागो, बॉम्बे और लखनऊ समेत विभिन्न शैक्षणिक केंद्रों तथा उनसे जुड़ी बौद्धिक विचारधाराओं पर चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता के स्वागत वक्तव्य से हुई। इसके बाद प्रो. अर्चना वर्मा ने प्रो. आभा अवस्थी के अकादमिक और सामाजिक योगदान पर आधारित स्मृति-साइटेशन पढ़ा।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी:प्रो. आभा अवस्थी की याद में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिकता' पर चर्चा हुई