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लखनऊ के बलरामपुर गार्डन, अशोक मार्ग पर चल रहा 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला समापन की ओर बढ़ रहा है। 11 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में शुक्रवार को नौवें दिन पुस्तक विमोचन, साहित्यिक चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस बार मेले की थीम वंदे मातरम् है। मेले में प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, निराला, हरिवंश राय बच्चन, रवींद्रनाथ टैगोर, दिनकर और महाश्वेता देवी जैसे साहित्यकारों की किताबों की मांग है। वहीं, समकालीन समाज, राजनीति और मानवीय संवेदनाओं पर लिखी नई किताबें भी पाठकों को पसंद आ रही हैं। नई किताबों की बढ़ी मांग शैलेश कुमार का कविता संग्रह पहला पन्ना, अंबर पांडेय का कथा संग्रह लावारिस सामान का कमरा और हिमांशु श्रीवास्तव के उपन्यास नदी फिर बह चली व लोहे के पंख पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं। दिव्य प्रकाश दुबे की टेंशन मत ले यार और नीलोत्पल मृणाल की विश्वगुरु भी पसंद की जा रही हैं। रेख्ता के स्टॉल पर गालिब, मीर, बशीर बद्र और निदा फाजली की शायरी की किताबें उपलब्ध हैं। हर मौके के लिए शेर और बेलगाम शायरी की भी मांग है। वाणी, ज्ञानपीठ, राजपाल, प्रभात और राजकमल समेत कई प्रकाशकों के स्टॉल पर साहित्य की विविध विधाओं की किताबें मौजूद हैं। न्यायिक सुधार पर चर्चा मुख्य मंच पर अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा की पुस्तक ‘ज्यूडिशियल रिफॉर्म थ्रू इंस्टीट्यूशनल इंट्रोस्पेक्शन’ का विमोचन न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका का मजबूत होना जरूरी है। वक्ताओं ने संस्थागत सुधार और संवैधानिक सिद्धांतों के पालन पर विचार रखे। कविता पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कृति और कृतिकार कार्यक्रम में महेंद्र भीष्म समेत साहित्यकारों ने विचार रखे। डॉ. नीलम राकेश की तीन पुस्तकों का विमोचन किया। लेखक से संवाद में पूजा श्रीवास्तव की स्वबोध और स्व से समष्टि तक पर चर्चा हुई। क्रिएटर लाउंज में विद्यार्थियों ने ओपन माइक पर अपनी प्रतिभा दिखाई। बच्चों ने योग प्रदर्शन भी किया।
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लखनऊ में 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला समापन की ओर:बलरामपुर गार्डन में चल रहा, 11 अक्टूबर अंतिम दिन होगा