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राजधानी लखनऊ में हरिश्चंद्र वंशीय रस्तोगी समाज की महिला समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को समापन हो गया। राजाबाजार स्थित गीता सत्संग भवन में आयोजित इस कथा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। अंतिम दिन आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सेवा भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। समापन दिवस पर कथा व्यास आचार्य उमेश कुमार मिश्रा ने ‘सुदामा चरित्र’ और ‘परीक्षित मोक्ष’ का वर्णन किया। उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता को जीवन का आदर्श बताया। आचार्य मिश्रा ने कहा कि सच्ची भक्ति अहंकार का त्याग और परोपकार की भावना में निहित है। सुदामा की गरीबी, उनकी भक्ति और भगवान कृष्ण की कृपा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भक्ति का वास्तविक फल वैराग्य और सेवा में निहित आचार्य मिश्रा ने अपने प्रवचन में यह भी कहा कि भक्ति का वास्तविक फल वैराग्य और सेवा में निहित है। उन्होंने लोगों से धार्मिक आयोजनों को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर समाज सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर ‘सुहासिनी’ संस्था और आचार्य उमेश मिश्रा ने समाज सेवा की एक सराहनीय पहल की। कथा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई सामग्री, जिसमें साड़ियां, वस्त्र, बर्तन और गृहस्थी का अन्य सामान शामिल था, उसे दो निर्धन कन्याओं के विवाह हेतु भेंट कर दिया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने दोनों कन्याओं और उनके परिवारों को बुलाकर यह सामग्री सौंपी, जिससे आयोजन की सार्थकता और बढ़ गई। कमजोर वर्ग की मदद करना ही सच्ची ईश्वर सेवा है संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना ही सच्ची ईश्वर सेवा है। उन्होंने जोर दिया कि दान तभी सार्थक होता है, जब वह जरूरतमंदों के काम आए।कार्यक्रम की सराहना करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष रागिनी रस्तोगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सीमा रस्तोगी, मंत्री शालिनी रस्तोगी, कोषाध्यक्ष ऋचा रस्तोगी और संगठन मंत्री क्षमा रस्तोगी समेत समाज के कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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लखनऊ में सात दिवसीय भागवत कथा संपन्न:हरिश्चंद्र वंशीय रस्तोगी समाज की महिला समिति ने किया आयोजन