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लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में बुधवार को ‘छोड़ो कल की बातें’ नाटक का मंचन किया गया। श्रद्धा मानव सेवा समिति द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने रिश्तों में बढ़ती दूरियों, मानवीय संवेदनाओं के क्षरण और भौतिकता की अंधी दौड़ जैसे समकालीन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया। जेपी सिंह ‘जयवर्धन’ द्वारा रचित और अनुपम बिसारिया द्वारा परिकल्पित व निर्देशित इस नाटक ने संयुक्त परिवारों में घटती आत्मीयता, रिश्तों में बढ़ती उदासीनता और बुजुर्गों की पीड़ा को मंच पर जीवंत किया। यह आधुनिक जीवनशैली के कारण व्यक्ति के आत्मकेंद्रित होने और परोपकार, सहयोग व दया जैसे मानवीय मूल्यों के क्षरण को उजागर करता है। अनाथालयों की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की नाटक ने समाज में बढ़ते वृद्धाश्रम, विधवा आश्रम और अनाथालयों की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की, जो टूटती संवेदनाओं का प्रतीक हैं। कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कोई भी बुजुर्ग अपनी इच्छा से वृद्धाश्रम नहीं जाता, बल्कि परिस्थितियां उसे वहाँ पहुँचा देती हैं। मंच पर कलाकारों की दमदार अदायगी ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। आदित्य वर्मा ने टप्पू, अश्वनी मक्खन ने जगन लाल, राजेश मिश्रा ने घनश्याम, अनुपम बिसारिया ने महावीर और अनीता वर्मा ने उमा देवी की भूमिकाओं में प्रभावशाली अभिनय किया। उनके सशक्त संवादों और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।
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लखनऊ में ‘छोड़ो कल की बातें’ नाटक का मंचन,:रिश्तों में बढ़ती दूरियों और संवेदनहीनता पर किया प्रहार