लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में इलाज पर सवाल:2-3 दिन तक मरीजों को नहीं देखते सीनियर डॉक्टर


लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। यहां मरीज भर्ती तो हो रहे हैं, लेकिन इलाज समय पर नहीं मिल रहा। तीमारदारों का आरोप है कि कई मरीजों को दो से तीन दिन तक वरिष्ठ डॉक्टर देखने नहीं पहुंचते। जूनियर डॉक्टर ही इलाज की औपचारिकता निभा रहे हैं। इससे गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ रही है। आरोप है कि भर्ती मरीजों की सूचना संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों तक भी समय पर नहीं पहुंच रही, जिससे इलाज में देरी हो रही है। करीब 800 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल में लखनऊ ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। केजीएमयू, एसजीपीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान से भी बेड न मिलने पर बड़ी संख्या में मरीज यहां रेफर किए जाते हैं। बावजूद इसके, इमरजेंसी की बदहाल व्यवस्था मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा रही है। ऑपरेशन के बाद संक्रमण, फिर भी नहीं पहुंचे वरिष्ठ डॉक्टर काकोरी के नौबस्ता निवासी अनिल कुमार मौर्य सीढ़ी से गिरने के बाद बाएं पैर का ऑपरेशन एक निजी अस्पताल में कराकर घर लौटे थे। उनकी पत्नी ज्ञानवती के अनुसार ऑपरेशन के बाद संक्रमण फैल गया और पूरे शरीर में फफोले पड़ गए। गंभीर हालत में गुरुवार को उन्हें बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, लेकिन आरोप है कि शुक्रवार दोपहर तक कोई वरिष्ठ चिकित्सक देखने नहीं आया। इलाज के नाम पर केवल एक ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई गई, जबकि मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही। रेफर होकर पहुंची महिला, विशेषज्ञ डॉक्टर के इंतजार में माल क्षेत्र की रहने वाली कुंती को लूज मोशन की गंभीर शिकायत के बाद सीएचसी से रेफर कर गुरुवार शाम बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि न तो कोई वरिष्ठ चिकित्सक मरीज को देखने आया और न ही यह बताया गया कि उनका इलाज किस डॉक्टर की देखरेख में चल रहा है। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही। शिकायत के बाद पहुंचे डॉक्टर, तब हुई डायलिसिस माल निवासी रामलखन अवस्थी को किडनी संबंधी गंभीर बीमारी के चलते बुधवार को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार दोपहर तक संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज को देखने नहीं पहुंचे। अस्पताल प्रशासन से शिकायत के बाद चिकित्सक पहुंचे और डायलिसिस कराई गई, जिससे मरीज को राहत मिली। बाद में पता चला कि संबंधित विशेषज्ञ को मरीज के भर्ती होने की सूचना ही नहीं दी गई थी। हार्ट मरीज की रेफरल फाइल बनाने में सवा दो घंटे उन्नाव निवासी 57 वर्षीय रानी को शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे गंभीर हालत में इमरजेंसी लाया गया। जांच में उनका शुगर लेवल बेहद कम मिला, जिसके बाद प्राथमिक उपचार दिया गया। करीब 10:30 बजे चिकित्सक ने परीक्षण कर ईसीजी कराने के बाद लारी कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया। आरोप है कि रेफरल फाइल तैयार करने में अस्पताल स्टाफ ने करीब सवा दो घंटे लगा दिए। इसके बाद परिजनों से 108 एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा गया। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज के उपचार का ‘गोल्डन पीरियड’ निकल गया।

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