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लखनऊ के काकोरी स्थित जैन मंदिर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को गर्भ कल्याणक उत्तर भाग की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत नांदीमंगल, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा और देवागम विधि के साथ हुई। इसके बाद देवों द्वारा भगवान का नित्य अभिषेक और पूजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में विधि दीदी और सुनीता दीदी की दीक्षा विधि भी संपन्न कराई गई। श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों का अवलोकन किया दोपहर के सत्र में महायागमंडल आराधना के साथ तीर्थंकर प्रभु के माता-पिता की गोद भराई एवं सीमंतनी क्रिया का मंचन किया गया। इस मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों का अवलोकन किया और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। शाम को जैन काशी मूडबिद्री (कर्नाटक) के जगतगुरु स्वस्ति चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के सानिध्य में माता पद्मावती की भव्य प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इसके बाद गर्भ कल्याणक की आंतरिक क्रियाएं, महाआरती और शास्त्र सभा का आयोजन किया गया। रात्रि में सजे भव्य इंद्र दरबार में तत्व चर्चा हुई, जहां सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान होने और माता द्वारा देखे गए 16 स्वप्नों के फलादेश का जीवंत वर्णन किया गया। इस दौरान पूरी धर्मसभा तालियों और जयकारों से गूंजती रही। 16 स्वप्न भविष्य के लोककल्याणकारी व्यक्तित्व का संकेत देते हैं अपने मंगल प्रवचन में आचार्य विशुद्ध सागर ने कहा कि गर्भ कल्याणक जीव के रूपांतरण का महापर्व है। उन्होंने बताया कि तीर्थंकर के गर्भ में आने से संपूर्ण सृष्टि पवित्र हो जाती है और माता द्वारा देखे गए 16 स्वप्न भविष्य के लोककल्याणकारी व्यक्तित्व का संकेत देते हैं। मंदिर के प्रमुख विशाल जैन और संयोजक ब्रिजेश जैन बंटी ने बताया कि शुक्रवार को भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुबह 8 बजे दुर्गागंज चौराहा, काकोरी से भव्य जन्म कल्याणक शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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लखनऊ के काकोरी जैन मंदिर में पंचकल्याणक महोत्सव:दूसरे दिन गर्भ कल्याणक उत्तर भाग की क्रियाएं संपन्न