रेलवे का ‘कवच’ ट्रेनें टकराने से रोकेगा:आमने-सामने ट्रेनें आई तो 3Km पहले ही ऑटोमेटिक ब्रेक लगेंगे, झांसी मंडल में शुरू हुआ काम


झांसी मंडल में रेलवे ट्रैक और ट्रेनाें में ‘कवच’ लगाया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि ये ट्रेनों को आपस में टकराने नहीं देगा। क्योंकि, इसमें ऐसी तकनीकी विकसित की गई है कि अगर एक ही ट्रैक पर आमने-सामने ट्रेन आ जाती हैं तो लगभग 3 से 4 किलोमीटर पहले ही ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएंगे और दोनों ट्रेन रुक जाएंगी। स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ ट्रेन हादसों को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। झांसी मंडल में कवच लगाने का काम शुरू हो चुका है। अभी हेतमपुर से मुरैना खंड के बीच लगभग 14 किलोमीटर तक इसका काम पूरा हो चुका है। एक साल के अंदर कवच लगाने का काम मुरैना से झांसी और बीना तक पूरा करने का लक्ष्य है। तीन फेस में पूरा होगा काम डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने बताया- कवच गाड़ी संचालन में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने वाली कार्यप्रणाली है। इसमें आरएफआईडी तकनीक के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है कि ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने–सामने न आए। अगर गलती से आ भी जाएं तो कवच के माध्यम से दोनों ट्रेनों में अपने आप ब्रेक लग जाता है। इससे हादसे की संभावना समाप्त हो जाती है। अभी तक झांसी डिवीजन में मुरैना के पास तक का काम पूरा हो चुका है। आगे काम चल रहा है। इसे मार्च 2027 तक बीना तक किया जाना है। दूसरे फेस में कानुपर ट्रैक और फिर मानिकपुर ट्रैक पर कवच लगाने का काम किया जाएगा। 25 किलोमीटर से ट्रैकिंग शुरू हो जाती है डीआरएम ने बताया कि कवच में आरएफआईडी एडवांस टेक्नोलॉजी है। इसमें रेलवे ट्रैक पर टॉवर और ट्रेन में इंजन के ऊपर एक डिवाइस लगाई जाती है। जो पता लगाती है कि गाड़ी कहां पर है और किस स्पीड से चल रही है। इसी तरीके से सामने से जो ट्रेन आ रही होती है, वो भी यही प्रक्रिया अपनाती है और जहां कॉडिनेट मैच होते हैं। यानी दोनों गाड़ी एक ही ट्रैक पर है तो ब्रेक लग जाते हैं। यह कवच 25 किलोमीटर दूर से ट्रेकिंग शुरू कर देता है और फिर 3 से 4 किलोमीटर पहले ही अपने आप ब्रेक लग जाते हैं।

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