मोबाइल चार्जर विवाद में झुलसी महिला की सातवें दिन मौत:देवर देवरानी ने डीजल डालकर जलाया था, एक महीने की बच्ची दूध के लिए तड़प रही


नगला कुशल गांव में मोबाइल चार्जर को लेकर हुआ मामूली विवाद जानलेवा साबित हुआ। 28 सितंबर को देवर और देवरानी से विवाद के बाद करीब 90 प्रतिशत झुलसी बेबी ने रविवार देर रात सैफई पीजीआई में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह सात दिन से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं। मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर देवर रजनीश और देवरानी जूली देवी ने बेबी से गाली-गलौज और मारपीट की। इसके बाद उस पर डीजल डालकर आग लगा दी गई। परिजनों ने गंभीर हालत में उन्हें सैफई पीजीआई में भर्ती कराया था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मॉर्चरी भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम सैफई में ही कराया जाएगा। चार बच्चों के सिर से उठा मां का साया बेबी ने करीब एक महीने पहले ही बेटी को जन्म दिया था। अब उसकी दुधमुंही बच्ची के सिर से मां का साया उठ गया है। बेबी के तीन अन्य बच्चे भी हैं। इनमें लक्ष्मी 8 साल, प्रिया 6 साल और बेटा पीयूष 4 साल का है। मां की मौत के बाद चारों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उनके पिता संजू पर आ गई है। चारों बच्चों को नहीं पता, मां अब कभी नहीं लौटेगी बेबी की सबसे छोटी बेटी अभी इतनी छोटी है कि उसे मां के चले जाने का एहसास भी नहीं है। जिस मां ने करीब एक महीने पहले उसे जन्म दिया था, अब वह हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। वहीं तीन बड़े बच्चों के सामने भी मां के बिना जिंदगी शुरू करने का संकट खड़ा हो गया है। सात दिन तक सैफई में चला इलाज 28 सितंबर को विवाद के बाद आग की चपेट में आने से बेबी गंभीर रूप से झुलस गई थीं। करीब 90 प्रतिशत झुलसी हालत में उन्हें सैफई पीजीआई में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में सात दिन तक इलाज चला, लेकिन रविवार रात करीब 11 बजे उनकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई। पहले से दर्ज था जानलेवा हमले का केस पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद देवर रजनीश और देवरानी जूली देवी के खिलाफ जानलेवा हमले के आरोप में केस दर्ज किया गया था। महिला की मौत के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी बताए जा रहे दोनों समेत अन्य परिजन घर में ताला लगाकर फरार बताए जा रहे हैं।

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