मिल्कीपुर में हद बरारी के 100 से अधिक मामले लंबित:वर्षों पुराने मामलों का नहीं हो रहा निस्तारण, भूमि विवादों की बढ़ी संख्या


अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में बढ़ते भूमि विवादों के पीछे राजस्व विभाग की धीमी कार्यप्रणाली भी बड़ा कारण बन रही है। ग्रामीण इलाकों में खेतों की पैमाइश और सीमांकन को लेकर सबसे ज्यादा विवाद सामने आ रहे हैं। समय पर हदबंदी और पक्की पैमाइश नहीं होने से छोटे-छोटे विवाद लंबे समय तक चलते हैं और कई बार खूनी संघर्ष का रूप ले लेते हैं। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत पक्की पैमाइश की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है। इसके बावजूद मिल्कीपुर तहसील में एसडीएम न्यायालय में धारा-24 के 100 से अधिक मामले लंबित हैं। कई प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें वर्षों बाद भी पैमाइश नहीं हो सकी है। नोटिस के बाद भी नहीं हो रही पैमाइश नियम के अनुसार एसडीएम न्यायालय में वाद दाखिल होने के बाद दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई की जाती है। अभिलेखों के आधार पर भूमि की चौहद्दी तय होने के बाद राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर पैमाइश करती है, लेकिन विभागीय देरी के कारण शिकायतकर्ताओं को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। धमथुआ गांव के शोभनाथ ने बताया कि उन्होंने एक वर्ष पहले खेत की पैमाइश के लिए वाद दायर किया था, लेकिन कई तारीखें मिलने के बाद भी नाप नहीं हो सकी। गोकुला गांव के विनोद कुमार ने भी लगातार तारीख मिलने और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने की बात कही। भूमि विवाद में जा चुकी हैं दो जानें इमामगंज निवासी राम अभिलाष की भूमि पैमाइश का मामला भी लंबित था। 10 जुलाई को भूमि विवाद में हुई मारपीट में घायल राम अभिलाष की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसी तरह चौधरीपुर निवासी जमुना प्रसाद की भी भूमि विवाद से जुड़ी मारपीट में जान जा चुकी है। SDM बोले- जल्द होगा निस्तारण एसडीएम मिल्कीपुर पवन कुमार शर्मा ने बताया कि लंबित मामलों के निस्तारण के लिए लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। जल्द रिपोर्ट लेकर मामलों का निस्तारण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि चकमार्गों से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी लगातार की जा रही है।

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