बेटी से मिलने की तड़प में बेचैन मुस्कान, खाना-पीना छोड़ा:दोषी करार होने के बाद पूजा-पाठ से भी हुआ मोहभंग,बुधवार को अदालत सुनाएगी सजा


मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी करार दी गई मुस्कान रस्तौगी इन दिनों अपनी बड़ी बेटी से मिलने के लिए बेचैन है। सजा सुनाए जाने के बाद लखनऊ नारी निकेतन में शिफ्ट किए जाने की आशंका ने उसकी बेचैनी और बढ़ा दी है। वह जेल अधिकारियों से बेटी से मिलने की गुहार लगा रही है। उधर, दोषी करार दिए जाने के बाद साहिल शुक्ला भी गुमसुम है। दोनों के व्यवहार में आए बदलाव को देखते हुए जेल प्रशासन उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। मुस्कान पर निगरानी के लिए अतिरिक्त ड्यूटी भी लगाई गई है। बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत दोनों को सजा सुनाएगी। बेटी से मिलने की चाह, दिनभर बेचैन रही मुस्कान
मुस्कान की बड़ी बेटी फिलहाल अपने नाना-नानी के पास रह रही है। बेटी से दूरी और सजा के बाद दूसरी जगह भेजे जाने की आशंका उसे परेशान कर रही है। जेल सूत्रों के मुताबिक, मुस्कान ने खाना-पीना भी कम कर दिया है। मंगलवार को वह दिनभर बेचैन दिखाई दी। उसने किसी से बातचीत नहीं की और बेटी को गोद में लेकर एक तरफ बैठी रही। बताया जाता है कि पहले मुस्कान जेल में पूजा-पाठ भी करती थी लेकिन दोषी करार दिए जाने के बाद से उसका पूजा-पाठ में भी मन नहीं लग रहा है। अफसरों से लगा रही मदद की गुहार
मुस्कान को आशंका है कि सजा के बाद उसे लखनऊ नारी निकेतन में शिफ्ट किया जा सकता है। इसी वजह से वह अधिकारियों से बेटी से मिलने की गुहार लगा रही है। हालांकि उसे शिफ्ट किए जाने को लेकर अंतिम स्थिति सजा और संबंधित नियमों के अनुसार ही स्पष्ट होगी। अफसरों का कहना है कि जेल में मुस्कान के किसी परिजन अथवा रिश्तेदार का कोई पता अथवा नंबर नहीं है। मुस्कान खुद पत्र लिख सकती है, जिसकी व्यवस्था करा दी जाएगी। साहिल भी गुमसुम, परिजन मिलने नहीं पहुंचे
मुस्कान की तरह साहिल शुक्ला के व्यवहार में भी बदलाव आया है। दोषी करार दिए जाने के बाद से वह गुमसुम रहने लगा है और उसने भी खाना-पीना कम कर दिया है। पहले उसकी नानी या भाई उससे मिलने जेल आया करते थे लेकिन दोषी करार दिए जाने के बाद अब तक परिवार का कोई सदस्य उससे मुलाकात करने नहीं पहुंचा है। जेल प्रशासन दोनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। दोनों की मानसिक स्थिति और दिनचर्या पर निगरानी के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। 573 दिन से जेल में बंद हैं दोनों
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तौगी और साहिल शुक्ला को 19 मार्च, 2025 को जेल भेजा गया था। मंगलवार तक दोनों को जेल में 573 दिन हो चुके थे। मुकदमे की सुनवाई करीब 13 महीने चली और इस दौरान कुल 126 तारीखें लगीं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए। इन्हीं गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को हत्या का दोषी करार दिया। अब बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में सजा पर फैसला होना है। फैसले को लेकर दोनों की बेचैनी बढ़ी हुई है। दोषसिद्धि के बाद अब उनकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। सजा के बाद बदल सकती है जेल
जेल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित अवधि की सजा होने पर कैदियों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। जेल से जुड़े नियमों के मुताबिक, साहिल शुक्ला को सात साल या उससे अधिक की सजा होने पर सेंट्रल जेल आगरा स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। वहीं, मुस्कान को लखनऊ नारी निकेतन भेजे जाने की आशंका ने उसकी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों को कहां रखा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय संबंधित जेल प्रशासन और लागू नियमों के तहत होगा। बुधवार का दिन इस चर्चित हत्याकांड में अहम होगा। अदालत के फैसले से जहां दोनों की सजा तय होगी, वहीं यह भी स्पष्ट होने की दिशा में कदम बढ़ेगा कि आगे उन्हें किस जेल में रखा जाएगा। मुस्कान के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी से मिलने की है।

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