बांग्लादेश में 20 साल का सबसे बड़ा बिजली संकट:अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज, भारत भी ज्यादा मदद नहीं कर पाएगा


बांग्लादेश इस समय 20 साल के सबसे गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। देश में बिजली की कमी से कई इलाकों में रोजाना घंटों कटौती हो रही है। बारिशाल के एक अस्पताल में बैकअप जनरेटर का डीजल खत्म होने के बाद नर्सों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी। संकट के बीच बांग्लादेश को भारत से भी तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है, क्योंकि भारत पहले ही उसे 2,656 MW से ज्यादा बिजली दे रहा है और अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए भारत को अपनी उत्पादन क्षमता और ट्रांसमिशन व्यवस्था को भी देखना होगा। 2022 के मुकाबले चार गुना ज्यादा बिजली की कमी बांग्लादेश में इस समय 3,000 से 3,500 मेगावाट बिजली कम पड़ रही है। यानी लोगों और कारखानों को जितनी बिजली चाहिए, उतनी बन ही नहीं पा रही। अगस्त में देश में रोज औसतन करीब 13,000 मेगावाट बिजली बनी, जबकि जरूरत 16,000 मेगावाट से ज्यादा थी। यानी हर दिन करीब 3,000 मेगावाट बिजली की कमी रही। 2022 में भी बांग्लादेश में बिजली का संकट आया था। तब कमी करीब 750 मेगावाट थी। यानी आज की कमी उस समय के मुकाबले करीब चार गुना है। 2007 में बिजली की कमी करीब 1,345 मेगावाट तक पहुंची थी। इस बार की कमी उससे भी काफी ज्यादा है। बिजली पैदा करने के लिए प्लांट में ईंधन की कमी बांग्लादेश में बिजली बनाने वाले प्लांट पर्याप्त हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए जरूरी ईंधन की कमी हो गई है। खासकर प्राकृतिक गैस की सप्लाई घटने से गैस आधारित प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। 2024-25 में बांग्लादेश की करीब 44% बिजली गैस से बनी थी। लेकिन देश में गैस का उत्पादन लगातार कम हुआ है। 2018-19 में घरेलू गैस उत्पादन 27.2 अरब घन मीटर था, जो 2024-25 में घटकर 19.6 अरब घन मीटर रह गया। कमी पूरी करने के लिए बांग्लादेश ने गैस का आयात बढ़ाया। इस दौरान आयात 143% बढ़कर 3.28 अरब से 7.98 अरब घन मीटर हो गया। LNG टर्मिनल बंद होने से बिजली संकट बढ़ा बांग्लादेश विदेशी से आने वाली गैस के लिए कॉक्स बाजार के मोहेशखाली में बने LNG टर्मिनलों पर निर्भर है। 21 जुलाई को दो टर्मिनलों में से एक में आग लग गई और उसे बंद करना पड़ा। इससे गैस की कमी और बढ़ गई। अगस्त में रोज करीब 2,235 मिलियन क्यूबिक फीट गैस मिल रही थी, जबकि जरूरत 3,860 मिलियन क्यूबिक फीट की थी। हालांकि, 16 सितंबर को द डेली स्टार ने बताया कि देश में गैस का उत्पादन बढ़ने के बाद सप्लाई अब पहले जैसी हो गई है। कोयला प्लांट भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे गैस की कमी के साथ कोयले से चलने वाले बिजली प्लांटों में खराबी ने भी संकट बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में ऐसे प्लांटों की कुल क्षमता करीब 7,000 मेगावाट है, लेकिन कई प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहे। चीन के साथ मिलकर बनाए गए पाटुआखाली के दो 1,320 मेगावाट के प्लांटों में हर एक से सिर्फ 500 से 800 मेगावाट बिजली बन रही थी। वहीं, भारत के साथ मिलकर बने 1,100 मेगावाट के रामपाल प्लांट में बॉयलर खराब होने से उत्पादन घटकर 657 मेगावाट रह गया था। खबर अपडेट हो रही…

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