बरसात बाद चिलुआताल से निकाली जाएगी गाद:CM ने किया था उद्घाटन; रामगढ़ताल की तरह यहां भी होगी बोटिंग


शहर के उत्तरी छोर पर स्थित चिलुआताल को भी धीरे-धीरे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस ताल के किनारे हुए सुंदरीकरण कार्य का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। चरणबद्ध तरीके से इसे और बेहतर बनाने की घोषणा भी की थी। अब इसका संचालन भी गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) करेगा। हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। रामगढ़ताल की तर्ज पर यहां भी बोटिंग शुरू की जाएगी। उसके लिए बरसात के बाद डिसिल्टिरंग होगी यानी गाद निकाली जाएगी। कहां से कितनी गाद निकालनी है इसके लिए रिमोट सेंसिंग डिपार्टमेंट के जरिए ताल का सर्वे कराया जाएगा।
इस सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि ताल में कहां से कितनी गाद निकालने की जरूरत है। यदि पहले से ही बोटिंग के लिए पर्याप्त गहराई मिलेगी तो संचालन शुरू कर दिया जाएगा। बोटिंग ताल में कितनी दूर तक की जाएगी, इसकी जानकारी भी इसी सर्वे के जरिए मिल जाएगी। लोगों के बीच तेजी से हुआ लोकप्रिय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लोकार्पण के बाद चिलुआताल घाट लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग यहां टहलने, प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने और परिवार के साथ समय बिताने पहुंच रहे हैं। अब जीडीए का लक्ष्य इस स्थल को केवल भ्रमण स्थल तक सीमित न रखकर एक समग्र पर्यटन और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसी योजना के तहत ताल फ्रंट परिसर में निर्मित दुकानों को भी जल्द संचालित किया जाएगा। इन दुकानों में खानपान और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही दुकानों से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग ताल फ्रंट के रखरखाव और संचालन पर किया जाएगा। पार्किंग व्यवस्था विकसित होने से आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा मिलेगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। रामगढ़ताल आज पूर्वांचल का प्रमुख पर्यटन, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है, उसी माडल पर चिलुआताल को भी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। भविष्य में यहां पर्यटन, नौकायन, मनोरंजन और सार्वजनिक आयोजनों की संभावनाओं को भी विकसित किया जाएगा। रामगढ़ताल की तर्ज पर मिलेंगी सुविधाएं
GDA उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि रामगढ़ताल की तर्ज पर चिलुआताल में पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। पर्यटन विभाग से हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यहां रिमोट सेंसिंग के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कहा ताल की कितनी गहराई है। उसके बाद डिसिल्टरिंग के लिए योजना बनेगा। ताल में सुरक्षित तरीके से बोटिंग की संभावनाएं तलाशने के बाद वहां बोटिंग शुरू हो जाएगी।

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