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केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर पेट्रोल-डीजल सस्ता करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार जल्द ही राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) कम करने की अपील कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा शासित 22 राज्यों में वैट में कटौती की पूरी संभावना है। डीजल की कीमतों को नियंत्रित करना प्राथमिकता है, क्योंकि इसका सीधा असर परिवहन, खेती और उद्योग जगत पर पड़ता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.9% बढ़कर $104.52 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। हालांकि, इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3.90 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। सचिवों के समूह ने की ईरान युद्ध के असर पर चर्चा ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर हाल ही में सचिवों के एक अधिकार प्राप्त ग्रुप की बैठक हुई। इस बैठक में चर्चा की गई कि महंगे कच्चे तेल के बोझ को कम करने के लिए वैट में कटौती जरूरी है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाकर शून्य कर दी थी, जबकि पेट्रोल पर ₹3 की कटौती की गई थी। अब केंद्र चाहता है कि राज्य भी अपनी ओर से टैक्स कम करें। डीजल पर फोकस, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई पर अधिकारियों के मुताबिक, भाजपा शासित राज्य सबसे पहले डीजल पर टैक्स कम करने पर विचार कर सकते हैं। भारत में हर साल करीब 9.47 करोड़ टन डीजल की खपत होती है, जो किसी भी अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से कहीं ज्यादा है। पेट्रोल का इस्तेमाल ज्यादातर निजी वाहनों के लिए होता है, लेकिन डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, खेती और इंडस्ट्री में होता है। अगर डीजल सस्ता होता है तो माल ढुलाई सस्ती होगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम गिरेंगे। अप्रैल में थोक महंगाई दर 42 महीने के उच्च स्तर 8.3% पर पहुंच गई थी। 2022 का फॉर्मूला फिर दोहराने की तैयारी अगर भाजपा शासित राज्य वैट कम करते हैं, तो यह साल 2022 की स्थिति जैसा होगा। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। तब भी केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और राज्यों से वैट कम करने को कहा था।
वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगी दल देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हैं। भारत में अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें 1 से 27% तक लगता हैं। इसमें कटौती होने से तेल की कीमतों में बड़ा अंतर आ सकता है।
एक्सपर्ट बोले- जनता के जीवन स्तर को बचाना जरूरी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, “ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ी हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ 4% के करीब बढ़े हैं। केंद्र ₹10 की एक्साइज ड्यूटी घटा चुका है, अब राज्यों की बारी है। हमें साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि आम नागरिक के जीवन स्तर पर कोई बुरा असर न पड़े। राज्यों को अपने खजाने पर ज्यादा असर डाले बिना यह कदम उठाना चाहिए।” राज्यों की कमाई और तेल कंपनियों का घाटा विपक्ष का पलटवार: ‘कीमतें बढ़ाने की जमीन तैयार हो रही’ दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ता रंजीत रंजन ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्यों से वैट घटाने के लिए कहना इस बात का संकेत है कि सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी की जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता था, तब केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरा और जनता को लाभ नहीं दिया।
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पेट्रोल-डीजल पर VAT घटा सकते हैं राज्य:तेलंगाना में सबसे ज्यादा लगता है टैक्स, ₹10 तक एक्साइज ड्यूटी घटा चुका केंद्र