![]()
विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को शुरुआत से ही ध्यान में रखना चाहिए। बांध, सड़क, रेलवे और जलाशयों जैसी परियोजनाओं से प्रभावित पुरातात्विक स्थलों का समयबद्ध सर्वेक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और जरूरत के अनुसार उत्खनन व संरक्षण जरूरी है। यह बात पद्मश्री डॉ. बीआर मणि ने गुरुवार को कैसरबाग स्थित राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे 12 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के समापन समारोह में कही। ‘पुरातत्व में संरक्षण एवं बचाव कार्य’ विषय पर व्याख्यान देते हुए डॉ. मणि ने कहा कि किसी पुरातात्विक स्थल या स्मारक को मूल स्थान पर सुरक्षित रखना संभव हो तो वहीं संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेष परिस्थितियों में विशेषज्ञों की देखरेख में वैज्ञानिक तरीके से स्मारकों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दोबारा स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने नागार्जुनसागर बांध से प्रभावित बौद्ध पुरावशेषों, भाखड़ा बांध के कारण जलमग्न हुए बिलासपुर के 28 मंदिरों और आलमपुर के संगमेश्वर मंदिर के स्थानांतरण को उदाहरण के रूप में समझाया। उन्होंने स्मारकों के दस्तावेजीकरण, स्थापत्य अवयवों को सुरक्षित रखने, क्रमबद्ध स्थानांतरण और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया बताई। पुरातत्व विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद समापन समारोह की अध्यक्षता प्रो. केके थपल्याल ने की। विशिष्ट अतिथि प्रो. एसएन कपूर ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम लोगों में पुरातत्व व सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करते हैं। विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने 12 दिनों में हुई शैक्षणिक गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को पुरातत्व के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के साथ विरासत संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था। 200 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा समापन समारोह में पुरातत्व आधारित निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण-पत्र दिए गए। पाठ्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को भी प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। करीब 150 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और 50 ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. अनिल कुमार, प्रो. दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव,रश्मि सिंह, नवयुग कन्या महाविद्यालय की प्रो. संगीता शुक्ला,डॉ. मनोज कुमार यादव और बलिहारी सेठ समेत अन्य गणमान्यजन और प्रतिभागी मौजूद रहे।
Source link
पुरातात्विक विरासत का शुरुआत से ही रखें ध्यान:पद्मश्री डॉ. बीआर मणि ने धरोहरों के संरक्षण और बचाव की बताई तकनीक