पीलीभीत में DIOS कार्यालय वेतन घोटाला:मुख्य आरोपी के बेटे और महिला को अग्रिम जमानत, कोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें


पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय से जुड़े एक करोड़ रुपये से अधिक के वेतन घोटाला मामले में मंगलवार को जनपद एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी के बेटे वामीक शम्सी और दिल्ली निवासी गुलनाज फखरूद्दीन खान को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने दोनों की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए, साथ ही कई सख्त शर्तें भी लागू कीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मुकदमा जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार की तहरीर पर थाना कोतवाली, पीलीभीत में दर्ज कराया गया था। आरोप है कि जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज, बीसलपुर में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के साथ मिलकर धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए वेतन मद से सरकारी धनराशि का गबन किया। जांच में आरोप है कि 12 सितंबर 2024 से 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से 1 करोड़ 1 लाख 95 हजार 135 रुपये सरकारी खाते से निकाल लिए गए। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से दलील दी गई कि वामीक शम्सी और गुलनाज फखरूद्दीन खान का नाम न तो एफआईआर में है और न ही उनका इस प्रकरण या शिक्षा विभाग से कोई प्रत्यक्ष संबंध है। शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक की विवेचना में दोनों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या नाम सामने नहीं आया है। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं। अदालत ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में दोनों को जमानत पर रिहा किया जाएगा। हालांकि, न्यायालय ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। आदेश के अनुसार, दोनों आरोपियों को प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होना होगा। वे किसी भी गवाह या संबंधित व्यक्ति को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेंगे, न्यायालय की अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएंगे और भविष्य में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। मामले की विवेचना अभी जारी है।

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