पं. लच्छू महाराज की स्मृति में कथक समारोह का समापन:कलाकारों ने कथक की अलग-अलग शैलियों में प्रस्तुति दी


उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और कथक केंद्र की ओर से कथकाचार्य पं. लच्छू महाराज की स्मृति में दो दिवसीय पारंपरिक कथक समारोह ‘नमन : परंपरा कथक की’ का मंगलवार को समापन हो गया। गोमतीनगर स्थित संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में कलाकारों ने कथक की अलग-अलग शैलियों और भावों से दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम की शुरुआत कथक केंद्र की प्रस्तुति ‘गुरु कृपा’ से हुई। नीता जोशी के निर्देशन में कलाकारों ने सामूहिक नृत्य पेश किया। इसके बाद श्रुति शर्मा के निर्देशन में ‘कथक के रंग कृष्ण के संग’ में कृष्ण भक्ति, गोपियों की चंचलता और प्रेम के भावों को नृत्य के जरिए प्रस्तुत किया गया। ‘झूलत राधे नवल किशोर’ पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति हुईं रजनी वर्मा के निर्देशन में ‘झूला’ प्रस्तुति में राग देस और रूपक ताल में ‘झूलत राधे नवल किशोर’ पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति हुईं । कवित्त, तिहाई, टुकड़ा, परमेलू और परन ने प्रस्तुति को खास बनाया। डॉ. रुचि खरे ने ध्रुपद अंग से प्रस्तुति शुरू की। राग मालकौंस में ‘शंकर अति प्रचंड’ के बाद ठाट, आमद, परन, गत निकास और अष्टपदी पेश की। शिष्याओं ने भी शानदार नृत्य से प्रस्तुति दी । अंत में दादरा ‘कोयलिया मत कर पुकार’ ने माहौल भावुक कर दिया। अभिनय व लयकारी का सुंदर मेल दिखाया इंदौर की डॉ. सुमित्रा हरमलकर ने गणेश स्तुति और रायगढ़ घराने की बंदिशों के साथ ताल नर्तन पेश किया। पुणे के डॉ. नंदकिशोर कपोते ने बिरजू महाराज की वंदना और ‘बाजे रे मुरलिया बाजे’ से अभिनय व लयकारी का सुंदर मेल दिखाया। तबला-घुंघरू जुगलबंदी को खूब सराहना मिली। मेरठ की प्रो. डॉ. भावना ग्रोवर ने नंदकुमार अष्टक, पारंपरिक कथक और बिंदादीन महाराज की ठुमरी ‘मेरी सुनो श्याम’ प्रस्तुत की। कृष्ण महारास आधारित कवित्त और तबला-पखावज जुगलबंदी ने दर्शकों की तालियां बटोरीं। फूलों और सतरंगी छतरी से सजा परिसर भी आकर्षण का केंद्र रहा।

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