'न्यूक्लियर बम हमारे लिए हराम, नहीं है हमारे पास':खामेनाई के प्रतिनिधि हकीम इलाही ने वाराणसी में दिया बड़ा बयान, बोले – सुप्रीम लीडर ने दिया था फतवा


‘30 साल पहले ही हमने यह क्लियर किया था की हमारे पास न्यूक्लियर हथियार नहीं है। और ना ही हमें यह हथियार चाहिए। सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनई ने उसी वक्त एक फतवा दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था की न्यूक्लियर बम रखना हराम है। हराम मुस्लिम कम्यूनिटी में क्या है सब जानते हैं। हमारे पास न्यूक्लियर बम नहीं है और ना ही हम भविष्य में उसे बनाने वाले हैं।’ ये कहना है ईरान के सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनई के आधिकारिक प्रतिनिधि डॉ अब्दुल मजीद हकीम इलाही का; डॉक्टर अब्दुल मजीद इलाही ने आगे कहा- हमने एक बार नहीं हजारों बार यह बात कही है कि न्यूक्लियर बम हमारे पास नहीं है। जबकि हमारे सुप्रीम लीडर ने इसपर फतवा दे रखा है तो उसे बनाना ही हराम है। डॉ अब्दुल मजीद इलाही शनिवार को वाराणसी के इमानिया अरबी कालेज और दरगाह फातमान में आयोजित ताजियाती जलसे में पहुंचे थे। यहां उन्होंने लोगों को सम्बोधित किया और हिन्दुस्तान के लोगों का ईरान का समर्थन करने के लिए दिल से शुक्रिया कहा। इस जलसे को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और शहर मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने भी सम्बोधित किया। दैनिक भास्कर ने डॉ अब्दुल मजीद हाकिम इलाही से जलसे के बाद बात की और ईरान के मौजूदा हालात, स्टेट और होर्मुज पर उनकी राय और ईरान का रुख जाना। पढ़िए रिपोर्ट… देखिये फातमान में हुए जैसे की तीन तस्वीरें… ईरान में हालात बहुत अच्छे डॉ अब्दुल मजीद इलाही से जब पूछा गया की ईरान में मौजूदा हालात क्या है ? तो उन्होंने कहा – इस समय ईरान में हालात बहुत अच्छे हैं। वहां के लोग खुश हैं और आध्यात्म के साथ ईरान के सर्मथन में हैं। इसके अलावा वो हालात से लड़ते हुए ईरान के साथ हैं और खुश हैं। उन्होंने कहा – हमारे देश के लोगों ने जो जज़्बा दिखाया है इस युद्ध में वो किसी से छुपा नहीं है। सभी ने ईरान के लोगों का जज़्बा देखा है। ईरान के लोग होपफुल हैं कि ईरान में पीसफुल सिच्युएशन होगी जल्द ही। क्योंकि वो अपना सबकुछ अपने ईरान के लिए सेक्रीफाई कर रहे हैं। न्यूक्लियर बम हमारे लिए हराम है न्यूक्लियर बम पर अमेरिका के बड़े बयानों के बीच डॉ अब्दुल मजीद हाकिम इलाही ने बनारस में बड़ा बयान दिया और कहा – 30 साल पहले ही हमने यह क्लियर किया था की हमारे पास न्यूक्लियर हथियार नहीं है। और ना ही हमें यह हथियार चाहिए। सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनई ने उसी वक्त एक फतवा दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था की न्यूक्लियर बम रखना हराम है। हराम मुस्लिम कम्यूनिटी में क्या है सब जानते हैं। हमारे पास न्यूक्लियर बम नहीं है और ना ही हम भविष्य में उसे बनाने वाले हैं। हजारों साल से खुला हुआ है होर्मुज स्टेट होर्मुज स्टेट पर डॉ अब्दुल मजीद ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने 28 फरवरी 2026 के पहले तक हजारों सालों से होर्मुज स्टेट खुला हुआ था। दुनिया के सभी देश स्टेट ऑफ होर्मुज का फायदा ले रहे थे। किसी ने कोई कम्प्लेन नहीं की थी इसे लेकर। लेकिन 28 फरवरी से जो तनाव स्टेट ऑफ होर्मुज के लिए शुरू हुआ है। तो आप को यह पता करना चाहिए की किसने यह क्राइसेज पैदा की है। ईरान ने इस परेशानी को नहीं पैदा किया है। ईरान तो हमेशा सबकी सुरक्षा में तत्पर है। क्योंकि स्टेट ऑफ होर्मुज मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया एके लिए एक महत्वपूर्ण जलडमरू है। मै जानता हुन की इसकी वजह से कई देश परेशानी झेल रहे हैं। लेकिन उन्हें इसके लिए उन लोगों से पूछना च्चिए जिन्होंने यह युद्ध छेड़ा है जो इसके जिम्मेदार हैं। 47 साल से हम झेल रहे प्रतिबंध डॉ अब्दुल मजीद ने कहा – ईरान की डेली लाइफ पर फर्क है क्योंकि हम पिछले 47 सालों से आर्थिक प्रतिबन्ध झेल रहे हैं। जिससे दुश्वारियां हैं, लेकिन ईरान के लोग अपने देश की स्वतंत्रता के लिए अगले 10 साल या उससे भी अधिक समय तक इस दबाव को सहने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। अध्यात्मा का सेंटर है बनारस डॉ अब्दुल मजीद हाकिम इलाही ने कहा – बनारस एक अच्छी सिटी है। यह ऐतिहासिक सिटी है। बनारस सिर्फ शहर नहीं है यह आध्यात्म का सेंटर है। फिलोसॉफी का सेंटर है और एकता का सेंटर है। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का जिक्र किया और कहा – बनारस के पास एक बड़ा विश्वविद्यालय है जहां हमारे देश से भी पढ़ने के लिए लोग आते हैं। 5000 साल से हमारा और हिन्दुस्तान का रिश्ता भारत और ईरान के रिश्तों पर बात करते हुए डॉ अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा – भारत और ईरान का रिश्ता आज का नहीं बल्कि यह 5 हजार साल पुराना रिश्ता है। ईरान आध्यात्म, एजुकेशन, फिलॉसिपी और अन्य चीजों से भारत से जुड़ा हुआ है। यह संबंध केवल कूटनीतिक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्म, शिक्षा, सभ्यता, दर्शन और अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव पर खड़ा है। वर्तमान में भी दोनों सरकारों के बीच बेहतरीन तालमेल और सहयोग है।

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