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बांदा में बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत के बाद खाद्य विभाग की जांच की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के तीन दिन बाद भी विद्यालय की रसोई से लिए गए खाद्य पदार्थों के छह नमूने लखनऊ स्थित खाद्य प्रयोगशाला में जमा नहीं हो सके। नमूने बुधवार देर रात कानपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे और गुरुवार सुबह लखनऊ पहुंच गए, लेकिन देर शाम तक अलीगंज स्थित प्रयोगशाला में इन्हें जमा नहीं कराया जा सका। इससे जांच रिपोर्ट आने और छात्रों की मौत के कारण स्पष्ट होने में देरी हो रही है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण नमूनों को कर्मचारी के माध्यम से लखनऊ नहीं भेजा जा सका। इन्हें रेलवे पार्सल के जरिए भेजा गया। दो छात्रों की मौत जैसे गंभीर मामले में नमूनों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल प्रयोगशाला तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। ठेले से मोमोज और फिंगर फ्राई खाने की भी नहीं हो रही जांच जांच में यह बात भी सामने आई है कि छात्रों ने महाराणा प्रताप चौराहे के पास एक ठेले से मोमोज और फिंगर फ्राई खरीदकर खाए थे। इसके बावजूद घटना के चार दिन बाद तक खाद्य विभाग और पुलिस ठेला संचालक तक नहीं पहुंच सकी। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय जयप्रकाश तिवारी के अनुसार ठेला संचालक मौके से फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। सवाल यह भी है कि घटना की जानकारी मिलते ही छात्रों और उनके साथियों से पूछताछ कर ठेले की पहचान, संचालक का पता और वहां बिकने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने तत्काल सुरक्षित क्यों नहीं किए गए। यदि बाहर से खरीदा गया खाद्य पदार्थ छात्रों की तबीयत बिगड़ने से जुड़ा है तो देरी जांच को प्रभावित कर सकती है।
चटनी का नमूना नहीं लिया, अहम कड़ी छूटी छात्रों द्वारा फिंगर फ्राई के साथ चटनी खाने की जानकारी भी सामने आई थी। घटना के बाद मेस में रखी चटनी की प्लेट हटा दी गई और उसे साफ कर दिया गया। सोमवार को खाद्य विभाग की टीम ने विद्यालय की रसोई से छह नमूने लिए। इनमें तैयार रोटी, पका चावल, सब्जी, मूंग दाल, रिफाइंड और आटा शामिल हैं। हालांकि छात्रों द्वारा खाई गई फास्ट फूड की चटनी का नमूना नहीं लिया जा सका। ऐसे में बाहर से खरीदे गए खाद्य पदार्थों और चटनी के नमूने सुरक्षित नहीं किए जाने को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी के छूटने के तौर पर देखा जा रहा है।
हजारों ठेले, कार्रवाई सीमित घटना के बाद खाद्य विभाग ने स्कूलों, होटल और जंक फूड की दुकानों की जांच शुरू की है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार भी सवालों के घेरे में है। शहर में बड़ी संख्या में जंक फूड के ठेले संचालित होने के बावजूद मंगलवार को केवल एक ठेले से फिंगर फ्राई और चटनी के नमूने लिए गए। इससे पहले तीन माध्यमिक विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन की जांच की गई। बुधवार को जवाहर नवोदय विद्यालय से अरहर दाल, गरम मसाला और सूजी के नमूने लिए गए। करीब 25 से 30 होटलों की जांच में बस स्टैंड स्थित एसएस रेजीडेंसी में गंदा फर्श और स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने पर सुधार नोटिस दिया गया। गुरुवार को डीएम के निर्देश पर तीन परिषदीय विद्यालयों का भी निरीक्षण किया गया। जिले में 1,725 परिषदीय विद्यालय हैं। ऐसे में दो छात्रों की मौत जैसी गंभीर घटना के बाद खाद्य जांच का दायरा बढ़ाने के साथ नमूनों को सुरक्षित तरीके से तत्काल प्रयोगशाला पहुंचाना भी जरूरी है।
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दो छात्रों की मौत के बाद खाद्य जांच पर सवाल:विद्यालय की रसोई से लिए छह नमूने लखनऊ की लैब में जमा नहीं हुए