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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा डीजल खरीद की सीमा प्रतिदिन 200 लीटर निर्धारित किए जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल आधारित व्यवसाय करने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। किसानों, ट्रांसपोर्टरों और डीजल इंजन संचालित मशीनों से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि इस निर्णय से उन्हें अतिरिक्त परेशानी और खर्च का सामना करना पड़ सकता है। मिल्कीपुर और अमानीगंज क्षेत्र में गेहूं की पिसाई, सरसों की पेराई तथा अन्य कृषि एवं व्यावसायिक कार्यों के लिए डीजल इंजन का व्यापक उपयोग होता है। इन कार्यों से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि डीजल खरीद पर निर्धारित सीमा के कारण उन्हें प्रतिदिन पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने भी आशंका जताई है कि 200 लीटर की सीमा उनके संचालन को प्रभावित कर सकती है। वहीं, नए निर्देशों के अनुसार बिना ‘केसो कंटेनर’ के किसी व्यक्ति को 200 लीटर डीजल नहीं दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि अधिकांश किसानों के पास ऐसे कंटेनर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। किसान ओम प्रकाश तिवारी, राधेश्याम, राजकुमार, ने बताया कि एक दिन के लिए 200 लीटर डीजल पर्याप्त हो सकता है, लेकिन बार-बार पंप पर जाना किसानों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। प्रगतिशील किसान रामकुमार का कहना है कि छोटे किसानों पर इसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़ी जोत वाले किसानों और बड़े कृषि कार्यों पर इसका असर पड़ना तय है। जिला पूर्ति अधिकारी बृजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार का यह आदेश हाल ही में प्राप्त हुआ है। फिलहाल इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से कोई अलग दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित नियमों के तहत केसो कंटेनर होने पर ही 200 लीटर डीजल देने के निर्देश हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 177 रिटेल और 275 आउटलेट पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ईंधन की बिक्री हो रही है।
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डीजल खरीद सीमा से किसानों, ट्रांसपोर्टरों की चिंता बढ़ी:रोज 200 लीटर की नई लिमिट से व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका