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झांसी के प्रेमनगर थाने की पुलिस देशभर में साइबर ठगी करने वाले गिरोहों की रकम को बैंक खातों में मंगाकर क्रिप्टो करेंसी में बदलने वाले बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शुक्रवार शाम गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 500 यूएसडीटी, सात मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद हुई है। गिरोह का मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। पहले 2 तस्वीर देखिए… पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए 56 बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन खातों में करीब 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल मिली है। इनमें अकेले झांसी के 35 बैंक खाते शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपी इन खातों का संचालन कर रहे थे। पुलिस ने नौ आरोपियों के खिलाफ प्रेमनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। एसपी (साइबर) अरीबा नोमान के मुताबिक समन्वय पोर्टल पर दर्ज 325 साइबर फ्रॉड की शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस को इन बैंक खातों के बारे में जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों की रकम इन खातों में भेजी जा रही थी। खातों से हुए लेनदेन की पड़ताल में करीब 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आई। ऐसे खपाते थे ठगी की रकम प्रेमनगर थाने की साइबर शाखा प्रभारी उपनिरीक्षक शिवकांत शुक्ल की टीम ने जांच के दौरान ईसाईटोला निवासी दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, कृष्णानगर कॉलोनी खेरा निवासी जान पाल, सुम्मेर नगर निवासी अभिषेक चौधरी और लहर गिर्द निवासी अर्चित श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे देशभर में सक्रिय साइबर ठगों से संपर्क कर उनकी ठगी की रकम अपने नियंत्रण वाले बैंक खातों में मंगाते थे। इसके बाद रकम को कई खातों और माध्यमों से घुमाया जाता था। फिर इसी पैसे से यूएसडीटी यानी क्रिप्टो करेंसी खरीदी जाती थी। रकम को नंबर एक में बदलने के बाद अपना कमीशन काटकर बाकी रकम साइबर ठगों तक पहुंचाई जाती थी। अरमान गिरोह का मास्टरमाइंड पूछताछ में गिरोह के नेटवर्क का मास्टरमाइंड गढ़िया फाटक निवासी अरमान बताया गया है। उसके साथ अर्श और मोहम्मद फैज भी गिरोह में शामिल हैं। पुलिस इन तीनों की तलाश कर रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क झांसी से बाहर कई राज्यों तक फैला हो सकता है और इसके तार देशभर में सक्रिय साइबर ठगों से जुड़े हैं। सत्यम को यूएसडीटी में रकम बदलते पकड़ा साइबर शाखा प्रभारी शिवकांत शुक्ल को गिरोह की गतिविधियों की भनक लगने के बाद पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन की निगरानी शुरू की। शुक्रवार को पुलिस ने सत्यम को साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी में बदलते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में ही आरोपियों ने एक खाते में करीब 9.75 लाख रुपये की रकम बदली थी। इसके बाद पुलिस ने अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई और छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क, देशभर में जुड़े साइबर ठगों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और रकम को अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर करने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है। क्या है यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी? यूएसडीटी एक तरह की क्रिप्टो करेंसी है, जिसे टेदर नाम की कंपनी जारी करती है। इसे अमेरिकी डॉलर से जोड़कर रखा जाता है। सामान्य तौर पर 1 यूएसडीटी की कीमत करीब 1 अमेरिकी डॉलर के बराबर रखने का प्रयास किया जाता है।
साइबर ठगी के मामलों में जालसाज इसका इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि डिजिटल तरीके से यूएसडीटी को एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर किया जा सकता है। इस गिरोह में भी पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाने के बाद उससे यूएसडीटी खरीदा जाता था। इसके बाद इसे आगे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था।
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झांसी पुलिस ने 403 करोड़ का साइबर फ्रॉड पकड़ा:छह गिरफ्तार, ठगी के रुपयों से खरीदते थे USDT क्रिप्टो करंसी