जिले में कम हुए 6.45 लाख मतदाताओं का सत्यापन होगा:हर वोटर के घर जाकर BLO देखेंगे वर्तमान स्थिति


मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 अप्रैल 2026 को पब्लिश अंतिम वोटर लिस्ट में जो मतदाता छूट गए थे या जिनके नाम कट गए थे, उनका दोबारा सत्यापन होगा। SIR के पहले 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित सूची की तुलना की जाएगी। पहले की सूची में शामिल जो नाम SIR के बाद वाली सूची में नहीं होंगे, उनका सत्यापन होगा। इनकी संख्या लगभग 6 लाख 45 हजार है।
ऐसे सभी मतदाताओं की बूथ स्तर पर सूची बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को दी जाएगी और वे सबके घर जाकर उसका सत्यापन करेंगे। सत्यापन के दौरान यह देखा जाएगा कि जिनके नाम बाद वाली सूची में नहीं हैं, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। इस दौरान जो वैध लोग मिलेंगे, उनसे फार्म 6 भरवाया जाएगा। एक महीने में पूरा करना होगा सत्यापन सत्यापन का अभियान एक महीने तक चलेगा। इस दौरान उन युवाओं को भी मतदाता बनाया जाएगा, जिन्होंने 18 साल की उम्र पूरी की है। एक महीने के भीतर सभी मतदाताओं का सत्यापन कर उनकी वर्तमान स्थिति दर्ज करते हुए सूची बनाई जाएगी। इसमें उन लोगों के नाम भी शामिल किए जाएंगे, जिनसे फार्म 6 भरवाए गए हैं। यह सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की जाएगी।
बेघर और श्रमिक बस्तियों में भी शिविर
अभियान केवल घर-घर सत्यापन तक सीमित नहीं रहेगा। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बूथ स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। रात्रि आश्रयों, श्रमिक बस्तियों, बेघर और समाज की मुख्यधारा से अलग रह रहे लोगों के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिक्षण संस्थानों, जनसंपर्क, स्वीप गतिविधियों और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए भी लोगों को नाम जुड़वाने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अभियान की नियमित समीक्षा और निगरानी करेंगे।
जानिए SIR से पहले और बाद में कितने मतदाता हैं गोरखपुर में SIR से पहले 36.66 लाख से अधिक मतदाता थे। अभियान में 6.45 लाख से अधिक नाम हटे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो मतदाता तो थे, लेकिन 2003 की मतदाता सूची में अपने, माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जरूरी जानकारी या अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। जिला स्तर पर SIR के बाद जारी आंकड़ों में 6,45,634 नाम हटने और मतदाताओं की संख्या घटकर 30,20,908 होने की जानकारी दी गई थी। SIR के दौरान फार्म छह के साथ घोषणा पत्र के जरिए 2003 के रिकार्ड की जानकारी देना महत्वपूर्ण हो गया था। अब इस अतिरिक्त बाध्यता के हटने से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जो पुराने पारिवारिक रिकार्ड की जानकारी न होने के कारण आवेदन की प्रक्रिया में अटक रहे थे।
चिल्लूपार में कटे हैं सर्वाधिक नाम
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो चिल्लूपार में सर्वाधिक 87,732 नाम कटे हैं। इसके बाद बांसगांव में 83,062 और खजनी में 83,014 नाम कटे। गोरखपुर ग्रामीण में 70,763, कैंपियरगंज में 68,242, चौरी चौरा में 67,355, पिपराइच में 62,175, गोरखपुर शहर में 62,152 और सहजनवां में 61,130 नाम कटे हैं।

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