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जिलाधिकारी अरविंद सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जनपद में संचालित पोषण संबंधी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने पोषण ट्रैकर पर बच्चों की लंबाई, वजन और आयु का डेटा समय पर दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने को कहा। अभिभावकों को कुपोषण के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाने पर विशेष बल दिया गया। डीएम ने कुपोषित और सामान्य बच्चों को अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित कर उनके अनुरूप पोषण प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं द्वारा किए गए गृह भ्रमण की प्रविष्टियां अनिवार्य रूप से पोर्टल पर दर्ज करने को कहा गया। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच कोई संचार गैप न हो, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी हर जानकारी उन तक पहुंचे। पोषण स्तर में सुधार लाना सर्वोच्च प्राथमिकता जिलाधिकारी ने आकांक्षात्मक विकास खंडों अवागढ़, सकीट और जैथरा में पोषण अभियान का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत अधिक से अधिक लाभार्थियों को जोड़ने पर जोर दिया गया। बाल विकास विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की समीक्षा करते हुए ‘फीडिंग इंडिया’ कार्यक्रम के फीडबैक के आधार पर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव का आकलन करने को भी कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद में पोषण स्तर में सुधार लाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। कुपोषण मुक्त जनपद बनाना सभी विभागों का साझा लक्ष्य होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जिला पंचायत राज अधिकारी राजकुमार मौर्य, जिला विद्यालय निरीक्षक कमलेश गुप्ता, बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह सहित समस्त सीडीपीओ, डीसी संजीव पचोरी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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जिला पोषण समिति की बैठक संपन्न:कुपोषण मुक्त जनपद बनाने पर दिया जोर, डीएम ने दिए निर्देश