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विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शों पर बने हजारों मकानों को बड़ी राहत मिली है। प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 तक जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत मानचित्रों के आधार पर बने भवनों को नियमित करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए भवन स्वामियों को निर्धारित शमन शुल्क जमा करना होगा और पूरी प्रक्रिया 12 महीने के भीतर पूरी करनी होगी। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद की ओर से जारी शासनादेश सभी विकास प्राधिकरणों, विशेष क्षेत्र प्राधिकरणों और आवास आयुक्त को भेज दिया गया है। आदेश के बाद वर्षों से क्षेत्राधिकार विवाद में फंसे हजारों मकानों के वैध होने का रास्ता साफ हो गया है। क्यों लिया गया फैसला विकास प्राधिकरणों की अधिसूचित सीमा में जिला पंचायतों ने बड़ी संख्या में नक्शे स्वीकृत किए थे। इन नक्शों के आधार पर मकान बन चुके हैं या निर्माणाधीन हैं। दूसरी ओर, विकास प्राधिकरण इन्हें अवैध मानते हुए नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहे थे। इसी विवाद को समाप्त करने के लिए शासन ने नियमितीकरण की व्यवस्था लागू की है। छोटे मकान मालिकों को बड़ा फायदा 200 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों पर बने मकानों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। शासन का मानना है कि इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के मकान मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी। बैक डेटिंग रोकने के निर्देश शासन ने जिला पंचायतों को निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत सभी मानचित्रों की प्रमाणित सूची 15 दिनों के भीतर संबंधित विकास प्राधिकरण और शासन को उपलब्ध कराई जाए। इससे कट-ऑफ डेट के बाद की बैक डेटिंग पर रोक लग सकेगी। यह आदेश सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों और विशेष क्षेत्र प्राधिकरणों के अध्यक्षों को भी भेजा गया है। शासन का दावा है कि इससे लंबे समय से लंबित हजारों भवनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तेज होगी। तीन श्रेणियों में होगा नियमितीकरण शासनादेश के अनुसार जिला पंचायत से स्वीकृत भवनों को तीन श्रेणियों में नियमित किया जाएगा। महायोजना के अनुरूप बने भवनों को प्राधिकरण सीधे वैध मानेगा। महायोजना के विपरीत बने भवनों को जोनिंग रेगुलेशन के अनुसार शमन शुल्क लेकर नियमित किया जाएगा। भू-उपयोग परिवर्तन वाले मामलों में निर्धारित शुल्क जमा कर नियमितीकरण होगा। इन निर्माणों को नहीं मिलेगी राहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ श्रेणियों के निर्माण किसी भी स्थिति में नियमित नहीं किए जाएंगे। जलाशयों, महायोजना मार्गों और सरकारी भूमि पर बने निर्माण। ग्रीन बेल्ट, पार्क और खुले क्षेत्र के लिए आरक्षित भूमि पर निजी उपयोग के लिए बनाए गए आवासीय भवन। हालांकि कुछ मामलों में समतुल्य भूमि आरक्षित किए जाने पर प्राधिकरण स्तर पर विचार किया जा सकेगा।
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जिला पंचायत से पास नक्शों पर बने मकानों को राहत:लखनऊ में 12 माह में होंगे नियमित; 200 वर्गमीटर तक 75% शुल्क छूट