छात्रों की मौत पर फुट फूट कर रोए परिजन:मथुरा हादसे पर मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद का किया ऐलान


वृंदावन के चैतन्य बिहार इलाके में मंगलवार की देर शाम हुए दर्दनाक हादसे ने मृतक छात्रों के परिजनों को जिंदगी भर न भूलने वाला दुख दे दिया है। परिजन अब उस पल को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपने लाड़लों को शिक्षा लेने के लिए गुरुकुल में भेजा। बुधवार को मथुरा पोस्टमॉर्टम हाउस पर पहुंचे परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। उनका कहना था शिक्षा के लिए भेजा था मजदूरी कराने नहीं। छात्रों की मौत के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर संचालक को लापरवाही बरतने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस हादसे में मृत हुए छात्रों के परिजनों को मुख्यमंत्री ने आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। ज्योतिष और वेदों की पढ़ाई के लिए कराया था एडमिशन हादसे में मृत हुआ विशु मेरठ के हस्तिनापुर निवासी मोहित शर्मा का बेटा था। विशु परिवार के लिए केवल एक सदस्य नहीं बल्कि सनातन परंपरा को आगे बढ़ने का सपना था। दो भाइयों में बड़े विशु हस्तिनापुर स्थित जयंती माता शक्ति पीठ से जुड़े पुजारी भी थे। जयंती माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि विशु का एडमिशन यहां ज्योतिष,वेद और भागवत गीता की पढ़ाई के लिए एडमिशन कराया था। सुदेश कुमार के अनुसार वह 18 अगस्त को यहां छोड़कर गए थे। परिजनों का आरोप है कि गुरुकुल के संचालक ने लापरवाही कराते हुए टैंक साफ कराया। मौके पर देखा उस टैंक में जाने का रास्ता बहुत छोटा था उसमें 4,5 बच्चे भेज दिए। उसमें गैस बन गई और बच्चों की मौत हो गई। गरीब परिवार के हैं बच्चे, जोड़ जोड़ कर दी फीस पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे जयंती माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया विशु का परिवार गरीब है। उसकी फीस सभी ने जोड़ जोड़ कर जमा की थी। सुदेश कुमार ने कहा गुरुकुल की बड़ी लापरवाही है हमने बच्चे को पढ़ने के लिए भेजा था न कि साफ सफाई कराने के लिए। सुदेश कुमार ने कहा उनकी मांग है जिन्होंने इन बच्चों के साथ जबरदस्ती की उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए। पुलिस ने विशु के पिता मोहित की शिकायत पर संचालक आचार्य आशीष और आघात आचार्यों के खिलाफ धारा 105 और 110 में मुकद्दमा दर्ज कर लिया। प्रबंधन का मिला फोन बंद हादसे में मृत विदिशा जिले के बढ़खेरा निवासी 18 वर्षीय देवांश शर्मा के परिजन बुधवार को पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। यहां बेटे का शव देखकर परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया। देवांश के पिता हल्के शर्मा ने बताया कि यहां 51 हजार तो फीस है इसके अलावा रोजमर्रा की जरुरत पर महीने में 2000 रुपए खर्च होते थे। यह लोग गुरुकुल में केवल रहना,एक टाइम का नाश्ता और 2 टाइम का भोजन देते थे। देवांश के पिता ने बताया उन्हें पुलिस से जानकारी मिली,इसके बाद प्रबंधन को फोन किया उनका फोन बंद था। हल्के राम ने आरोप लगाया कि जब शुल्क ले रहे हैं तो बच्चों से टैंक क्यों साफ कराया। वह भी रात को दस बजे जब सोने के लिए बच्चे जाते हैं। पांच भाई बहन में सबसे छोटा था आर्यन मृतकों में कौशांबी प्रयागराज का रहने वाला आर्यन भी था। पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे पिता कृष्ण कुमार खेती करते हैं। 3 भाई और 2 बहनों में आर्यन सबसे छोटा था। पिता ने बताया उसका एडमिशन यहां इसलिए कराया कि सनातन और संस्कृत के क्षेत्र में वह परिवार का नाम रोशन कर सके। परिवार को उम्मीद थी कि वह पढ़ाई पूरी करने के बाद आध्यात्म के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएगा। लेकिन गुरुकुल प्रबंधन ने जान बूझकर ऐसा काम कराया जिसने उसकी जिंदगी छीन ली। हादसे में मृत जबलपुर निवासी मनु के परिजन देर रात तक मथुरा नहीं पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने किया आर्थिक मदद का ऐलान टैंक सफाई के दौरान हुए हादसे में चारों छात्र की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना में मृत 4 बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही हादसे में बेहोश हुए पांचवें छात्र रुद्र का बेहतर इलाज करने और मामले की जांच करने के अधिकारियों को निर्देश दिए। इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। गुरुजी ने कहा बाल्टी से खाली कर दो गुरुकुल में 9 वीं के छात्र आदित्य ने बताया जब बच्चे सोने जा रहे थे तब गुरुजी ने कहा कि 2-3 घंटे लग कर इस टैंक को साफ कर दो। इसके बाद वह 7-8 बड़े बच्चों को नीचे ले गए। टैंक खोला तो उसमें बहुत बदबू आ रही थी। इसके बाद मोटर लगाई उससे आधा खाली हुआ। मोटर उससे नीचे नहीं जा पा रही थी। इसके बाद गुरुजी ने कहा इसमें नीचे जाओ और बाल्टी से खाली कर दो। इसके बाद मनु गए वह दस बारह बाल्टी पानी निकाल पाए होंगे कि वह बेहोश होने लगे और गिर गए। इसके बाद उनको बचाने दूसरे साथी गए वह भी गिर गए। गुरुजी इधर उधर भाग रहे थे लेकिन उनको बचा नहीं रहे थे। 3 साल की फीस 51 हजार रुपए आदित्य ने बताया यहां 3 वर्ष की फीस 51 हजार है, 1 वर्ष की 35 हजार रुपए है। और अगर कोई महीने के हिसाब से पढ़े तो उसका प्रति महीना 7 हजार रुपए है। एक अन्य छात्र अभिषेक दुबे ने बताया इसमें गंदगी बहुत है,यहां वरिष्ठ लोगों की हुकूमत चलती है। मंगलवार की रात को भी भोजन के बाद बच्चों को बुलाया गया और कहा कि जो टंकी का पानी नहीं निकालेगा उसके साथ मारपीट होगी। हादसे के बाद गुरुकुल में रहने वाले सभी छात्रों को उनके परिजन अपने साथ ले गए।

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