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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चार प्रमुख सचिवों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए हैं। यह कार्रवाई कर्मचारियों को वेतन और पेंशन संबंधी लाभ देने के चार साल पुराने आदेश का पालन न करने पर हुई है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने आदेश के अनुपालन का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने सुरेश चंद्र वर्मा मामले से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। जिन अधिकारियों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग और प्रमुख सचिव ग्रामीण अभियंत्रण सौरभ बाबू शामिल हैं। मूल आदेश में कर्मचारियों के वेतन का फिर से निर्धारण, बकाया वेतन और संशोधित पेंशन भुगतान का निर्देश था। चार महीने में लाभ न देने पर 7% ब्याज का भी निर्देश था। याचियों को चार साल बाद भी लाभ नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने भी 13 जनवरी 2026 को आदेश सही ठहराया। राज्य सरकार की अर्जी खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद सोमवार की सुनवाई में अनुपालन का कोई ठोस रिकॉर्ड सामने नहीं आने पर अदालत ने व्यक्तिगत रूप से मौजूद चारों अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए।
लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान के खिलाफ अवमानना के आरोप अगली सुनवाई में तय किए जाएंगे। अदालत ने सभी आरोपित अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने और 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
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चार प्रमुख सचिवों पर अवमानना के आरोप तय:हाईकोर्ट ने आदेश न मानने पर कड़ा रुख अपनाया, सबूत नहीं दे पाए अधिकारी