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उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल बुधवार को बिजनौर पहुंचे। उन्होंने कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में करीब एक बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने गौशालाओं के निरीक्षण और गोवंश संरक्षण के प्रयासों की जानकारी दी। उपाध्यक्ष शुक्ल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गौ सेवा आयोग की टीम गठित की गई है। इसी के तहत वे मुरादाबाद मंडल के बिजनौर जनपद का भ्रमण कर गौशालाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों में सुधार लाना और गोवंश का संवेदनशीलता से संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने समाज के लोगों से भी गौ सेवा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया, ताकि गोवंश संरक्षण के बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें। उपाध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार गौ सेवा को केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक मानवीय, सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी मानकर कार्य कर रही है। 50 रुपये की दर से धनराशि उपलब्ध राज्य सरकार निराश्रित और असहाय गोवंश के संरक्षण के लिए व्यापक योजनाएं संचालित कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-संरक्षण नीति के तहत, वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हैं। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है। राज्य सरकार गौशालाओं के प्रभावी संचालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। जन आंदोलन का रूप प्रदान इसी क्रम में गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। यह अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24 घंटे कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना’ के माध्यम से सरकार ने गौ-संरक्षण को जन आंदोलन का रूप प्रदान किया है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 1,67,065 गौवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गौपालकों को सुपुर्द किए गये हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक गौवंश के लिए 50 रु० प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे गोपालकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। जनपद बिजनौर में जिला प्रशासन द्वारा गो-संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 71 गो-आश्रय स्थल क्रियाशील हैं, जिनमें 10609 गौवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1301 प्रगतिशील गौपालकों ने सहभागिता योजना के अन्तर्गत 2403 गौवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार उ०प्र० गोवध निवारण अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत गौवंश के सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीति के अन्तर्गत गौवंश संरक्षण से सम्बन्धित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दण्डात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की कुछ असामाजिक एवं निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का खण्डन करते हुए उपाध्यक्ष गो सेवा आयोग महेश शुक्ल के द्वारा बताया गया कि गौ सेवा के पदाधिकारियों के द्वारा गौ-आश्रय स्थलों का नियमित भ्रमण करते हुए निरन्तर पैनी निगाह रखी जा रही है और कोई भी अनियमितता प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। इस समय कतिपय वेशधारी छदमधर्म प्रचारकों के द्वारा भ्रामक सूचनायें फैलाकर जनमानस को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि निराश्रित गौवंश की सेवा एवं संरक्षण के लिए कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। राज्य सरकार गौवंश के प्रति अपनी संवेदनशीलता, मानवीय एवं समर्पित दृष्टि के साथ सुशासन के सिद्धांतों को साकार करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है।
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गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष बिजनौर पहुंचे:प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौशाला निरीक्षण और संरक्षण की जानकारी दी