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गोंडा जिले में घाघरा और सरयू नदियां उफान पर हैं। आज गुरुवार सुबह 8:30 बजे घाघरा नदी खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर घटा है। आज कुल 3,34,242 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसमें गिरजा बैराज से 1,28,600, शारदा बैराज से 1,72,114, सरयू बैराज से 7,699 और सुहेली बैराज से 25,829 क्यूसेक पानी शामिल है। दोनों नदियों का पानी गांवों और लोगों के घरों में भर गया है। इससे तटीय इलाकों के ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आज भी दोनों तहसीलों के 35 गांवों की करीब 30 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। घरों में पानी भरने के कारण खाना बनाने की जगह नहीं है। ऐसे में ग्रामीण अपने घरों के बाहर तख्त लगाकर उसे ऊंचा कर मचान बना रहे हैं। इसी पर वे खाना बनाकर अपना जीवन चला रहे हैं। बाढ़ पीड़ित तख्त और चारपाई पर ही अपना पूरा समय काट रहे हैं। इन बाढ़ पीड़ितों के सामने पशुओं के चारे की सबसे बड़ी दिक्कत है। बेलसर, तरबगंज और नवाबगंज क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। आसपास और मुख्य मार्ग पर पानी होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। तीन विजुअल देखिए तख्त पर खाना बना रहे बाढ़ प्रभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। पिछले 24 घंटे से नदी का जलस्तर घटने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं। दूसरी तरफ, तटीय इलाकों में नदी की कटान तेज होने से नवाबगंज थाना क्षेत्र के कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लगातार सरयू और घाघरा नदी यहां पर किसानों की खाड़ी खेतों में गन्ने की फसल और लगी हुई धान की फसल लगातार काट करके अपने आगोश में ले रही है। मजदूरी करने जाने वाले इन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बाढ़ का पानी भर होने के कारण मजदूरी करने नहीं जा पा रहे हैं।
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गोंडा में घाघरा-सरयू नदी की बाढ़ का कहर:35 गांवों की 30 हजार आबादी प्रभावित, स्कूल बंद, देखें तस्वीरें