कुत्ते ने बचा ली 8 लोगों की जान:जो छज्जा गिरा, उसके नीचे बैठे थे 10 लोग; जानिए वहां क्या हुआ था


राप्ती नदी के तट पर अपने मित्र की माता को अंतिम विदाई देने गए दो अधिवक्ता अब इस दुनिया में नहीं हैं। बरसात से बचने के लिए वहां बने जिस चबूतरे पर उन्होंने शरण ली, उसी का छज्जा गिरने से उनकी मौत हो गई। लेकिन, वहां कुछ ऐसा हुआ था, जिससे 8 लोगों की जान बच गई। घटना स्थल पर मौजूद लोगों के बीच इस बात की खूब चर्चा है। दरअसल, उस छज्जे के नीचे 10 लोग बैठे थे, उसी दौरान वहां एक कुत्ता आया और बैठ गया। श्मशान घाट पर घूमने वाले इस कुत्ते के शरीर से तेज दुर्गंध आ रही थी। इससे परेशान होकर वहां बैठे लोग दूर चले गए। लेकिन आलोक अस्थाना और संजय सिंह वहीं बैठे रहे। वहां से जाते हुए लोगों ने कुत्ते को भी भगा दिया लेकिन इसके कुछ क्षण बाद ही बिजली कड़की और वह छज्जा भरभराकर गिर गया, जिसके नीचे दोनों अधिवक्ता दब गए और इलाज के दौरान दोनों लोगों की मौत हो गई।
इसकी पुष्टि वहां मौजूद लोग करते हैं। चाना देवी उसी चबूतरे से महज 6 से 10 मीटर की दूरी पर दुकान चलाती हैं। उनकी गुमटी में कर्मकांड से जुड़े सामान मिलते हैं। चिता सजाने, उसे जलाने में यदि कोई सामान रह जाता है, तो यहां से लोग खरीदते हैं। इसके साथ ही पानी भी वहां मिल जाता है। सुबह से चाना देवी खुद इस दुकान पर बैठी थीं और सारा वाकया उनकी आंखों के सामने हुआ। घटना के बारे में बताते हुए वह उस कुत्ते का जिक्र करना नहीं भूलतीं। जानिए प्रत्यक्षदर्शी ने जो बताया चाना देवी ने बताया “बारिश हो रही थी। 10 लोग उस छज्जे के नीचे आकर बैठे थे। तभी वहां कुत्ता आया और वहां बैठ गया, जिससे 8 लोग उठकर चले गए लेकिन दो लोग बैठे रहे। उसके बाद बिजली कड़की और छज्जा भरभराकर गिर गया। दोनों लोग उसी में दब गए।” कुत्ते के बारे में उन्होंने बताया “वह श्मशान घाट का कुत्ता है, शव के बचे हिस्से भी खाता है तो उससे दुर्गंध तो उठेगी ही।”
जिसकी अंत्येष्टि में आलोक और संजय सिंह गए थे, वह कृष्णानगर प्राइवेट कालोनी के आलोक मिश्रा की मामी थीं। आलोक मिश्रा भी कुछ देर पहले ही आए थे। वह भी आलोक व संजय के साथ उसी छज्जे के नीचे बैठे थे। आलोक बताते हैं “मैं, संजय, आलोक व मेरे साथ के 2 और लोग वहां बैठे थे। तभी वहां कुत्ता आ गया। उसकी दुर्गंध से परेशान होकर उसे कोसता हुआ मैं दूसरी ओर चबूतरे से उतर गया। तभी पानी भी तेज हो गया। मैं दूसरी ओर चला गया। उसी समय शव भी आ गया। मैं शव लेकर नदी की ओर चला गया। तभी अचानक बिजली कड़की और छज्जा भरभराकर गिर गया। हम लोग शव छोड़कर भागकर आए और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।” अब जानिए कुत्ते को लेकर चर्चा यह बात वहां मौजूद रहे लोग स्वीकार कर रहे हैं कि कुत्ते के आने से यदि दुर्गंध नहीं उठती तो लोग वहां से नहीं जाते और यह घटना होती तो कुछ और जानें भी जा सकती थीं। फिलहाल वहां लोगों में चर्चा है कि कुत्ते के कारण ही उतने लोगों की जान बच गई। यदि ऐसा कोई कारण न होता तो स्थिति और भयावह होती। मुख्यमंत्री ने दिया परिवार को हर संभव मदद का निर्देश इस घटना में दोनों अधिवक्ताओं की मौत हो गई। दोनों के ऊपर अपने परिवार की जिम्मेदारी थी। अभी उनकी सभी जिम्मेदारियां बची थीं। बच्चों की पढ़ाई चल रही थी। दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आपदा विभाग की ओर से दोनों मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का चेक दिया जा चुका है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 5-5 लाख रुपये और आर्थिक सहायता के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। यह सहायता भी जल्दी आ जाएगी।

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