काशी-मथुरा में भी मंदिर निर्माण के लिए संवाद जरूरी:महंत राजूदास बोले-आरक्षण में आर्थिक आधार को महत्व दिया जाए, संत सामाजिक मुद्दों पर बोलें


जालौन में एट क्षेत्र के पचोखरा धाम में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती के 71वें प्राकट्योत्सव कार्यक्रम में अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास पहुंचे। उन्होंने स्वामी राजेश्वरानंद रामायणी महाराज को प्राकट्योत्सव की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद उन्होंने संत समाज की भूमिका, सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति, मंदिरों से जुड़े विवाद और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। काशी-मथुरा के मामलों में कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़ने की बात महंत राजूदास ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न्यायिक प्रक्रिया के बाद हुआ। इसी तरह काशी और मथुरा से जुड़े मंदिर निर्माण के मुद्दों पर भी लोगों को संवाद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों को लेकर भी कई दावे किए। उनका कहना था कि मौजूदा समय में सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने घटनाक्रम, हनुमान चालीसा और 84 कोसी परिक्रमा का भी जिक्र किया। राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की बात राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर महंत राजूदास ने कहा कि इसे सीधे राम मंदिर में चोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की गिनती और बैंक संबंधी प्रक्रिया मंदिर परिसर से अलग कार्यालय में होती थी और इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आई। इस मामले में जून 2026 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में पुलिस ने नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच जारी है। महंत राजूदास ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं में संत समाज की भूमिका बढ़ाने और दान की व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही पर जोर दिया। अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना महंत राजूदास ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने गायत्री प्रसाद प्रजापति का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन जांच और कानूनी प्रक्रिया सभी मामलों में समान होनी चाहिए। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि उनके अनुसार संबंधित लोगों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा देकर जांच में सहयोग किया। अपराध के आधार पर कार्रवाई की बात अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी से जुड़े पोस्टर के सवाल पर महंत राजूदास ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अपने राजनीतिक और धार्मिक विचार भी रखे और कुछ लोगों पर हिंदू समाज व सनातन संस्कृति के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। आरक्षण में आर्थिक स्थिति को महत्व देने की पैरवी आरक्षण के सवाल पर महंत राजूदास ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि आरक्षण की व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि गरीब किसी भी जाति का हो सकता है, इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति को अवसर मिलना चाहिए। संतों से सामाजिक मुद्दों पर संवाद की अपील महंत राजूदास ने संत समाज से राजनीतिक दलों के दबाव से अलग रहकर सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतों को सनातन संस्कृति के साथ शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार जैसे विषयों पर भी समाज के बीच संवाद करना चाहिए। बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु पहुंचे पचोखरा धाम में स्वामी राजेश्वरानंद रामायणी के 71वें प्राकट्योत्सव के तहत सात दिवसीय धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में संत-महात्माओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। इस दौरान स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती के पुत्र-शिष्य गुरु प्रसाद और उनकी पुत्री भी मौजूद रहीं।

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